श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के निर्देशन में नवें दिन रविवार को देर रात्रि मंचित रामलीला कार्यक्रम के अन्तर्गत “कैकेयी मंथरा संवाद” के प्रसंग का मंचन किया गया. जिसमें दिखाया गया कि महाराज दशरथ अपने महल में मुकुट धारण कर रहे थे तो उन्हें कानों के समीप एक सफेद बाल दिखाई दिया. यह देखकर उन्होंने मन ही मन विचार किया कि अब राज्य का भार श्री राम को देकर वन प्रस्थान करना चाहिए. इसी विचार को वह अपने मंत्रिमंडल से भी साझा करते हैं, और इसके लिए वह अपने गुरुदेव वशिष्ठ के पास जाते हैं. दशरथ के मुख से श्री राम के राज्याभिषेक की बात सुनकर गुरुदेव प्रसन्न होते हैं और राज्याभिषेक के लिए उचित सामग्री की सूची देते हैं. फिर गुरु वशिष्ठ श्री राम के पास जाते हैं और उन्हें राजधर्म की शिक्षा देते हैं. श्री राम के राज्याभिषेक की खबर सारे नगर में फैल जाती है. नगरवासी उत्साहित हो जाते हैं और पूरा नगर सजने लगता है. इसी समय कैकेयी की दासी मंथरा आती है और नगर वासियों से उत्साह का कारण पूछती है. जब मंथरा को श्री राम के राज्याभिषेक की जानकारी मिलती है, तो वह सीधे कैकेयी के यहाँ जाती है और चुगली करते हुए उन्हें बहकाती है. मंथरा कैकई को बहकाने के लिए सौतन की कथा भी सुनाती है. जिससे कैकई मंथरा की बातों में आ जाती है, और राजा दशरथ से दो वरदान मांगती है पहले वरदान में श्री राम का बनवास और दूसरे में अपने बेटे भरत को राज.
उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है.
लीला मंचन के दौरान आयोजन समिति के बैकुण्ठ नाथ शर्मा, सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे. उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए.