सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम बक्सर द्वारा आयोजित 18वा धर्म आयोजन के अंतर्गत दूसरे दिन की श्रीमद् भागवत कथा- श्रीमद् भागवत महापुराण 335 अध्यायों 12 स्कंध 18 हज़ार श्लोकों का श्री कृष्ण भगवान की दिव्य वांग्मय मूर्ति है l कलयुग में यह ग्रंथ वासुदेव की चलती फिरती प्रतिमा है l इसके दर्शन, स्पर्श ,श्रवण ,प्रवचन मात्र से बड़े से बड़े पापी मनुष्य का लोक परलोक दोनों बन जाता है l मात्र 7 दिनों तक श्रद्धा भक्ति से जो कोई भी प्राणी इस ग्रंथ का श्रवण करता है उसका उद्धार यह कथा सुनिश्चित रूप से कर देती है l कलयुग के लिए सारी दुनिया में यह पारस पत्थर की तरह सहज ही वरदान के रूप में विद्यमान है l आज से 5096 वर्ष पूर्व भगवान सुखदेव ने ब्राह्मण द्वारा अभिशप्त राजा परीक्षित को यह कथा सुनाई थी ठीक सातवें दिन राजा का उद्धार हो गया l यह कथा भादो माह के शुक्ल पक्ष नवमी से पूर्णिमा तक हुई थी l उन्हें इसी भागवत कथा को इसी कलयुग में आज से 4896 वर्ष पूर्व श्रावण मास में शुक्ल पक्ष नवमी से पूर्णिमा तक महात्मा गोकर्ण ने उसी कालखंड के सबसे बड़े पापी धुंधकारी को श्रवण करा कर मोक्ष प्रदान किया था l यह कथा न केवल मनुष्यों के लिए कल्याणकारी है अपितु अखिल ब्रह्मांड के समस्त जनों के लिए परम कल्याणकारी है l भगवान नारायण की प्रियतम भक्ति तथा ज्ञान एवं वैराग्य के दुख दोष और ताप को भी यह कथा नष्ट करके सुख शांति एवं भगवत प्राप्ति कराती है l आज से 4866 वर्ष पूर्व वृंदावन की पावन धरा पर ज्ञान तथा वैराग्य अत्यंत वृद्ध एवं रोगी बनकर भयंकर दुख भोग रहे थे l श्रवण की भक्ति अशांति एवं असंतोष की भयंकर ज्वाला में झुलस रही थी उनकी यह दशा देखकर नारद जी को बड़ी दया आई नारद जी हरिद्वार में आनंद तट पर इन तीनों के लिए सनक सनन्दन सनातन सनत कुमार से इसी भागवत का श्रवण किए थे अभी कथा का महत्व हो रहा था कि ज्ञान वैराग्य और भक्ति का वृंदावन में ही कष्ट दूर हो गया और वह हरिद्वार में कथा के मध्य प्रकट होकर स्पष्ट रूप से घोषणा कर दिए की कथा से बढ़कर ब्रह्मांड में दूसरा कोई उपाय है ही नहीं अतः इस कथा से केवल परलोक की ही प्राप्ति नहीं होती अपितु इस लोक में भी अनंत सुखों की प्राप्ति होती है l यह कथा कल्प वृक्ष के समान फल देने वाली है इसकी छाया में बैठकर मनुष्य जिस जिस वस्तु का चिंतन करता है उसे उस वस्तु को यह भागवत ग्रंथ प्रदान करता है यह धर्म अर्थ काम इन तीनों पुरुषार्थों को प्रदान करता है जो इस संसार के लिए मनुष्य मात्र को जरूरी है l मानव को पद पैसा प्रतिष्ठा कीर्ति ख्याति आदि लौकिक समृद्धि इस कथा से प्राप्त होती है जिसके कारण मनुष्य इस लोक में नाना प्रकार का सुख भोगता है l शरीर अंत होने के बाद यही भागवत कथा उसी व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त करा देती है l साक्षात श्री कृष्ण को प्रदान कराने वाली भागवत कथा मानव मात्र के लिए अलौकिक फल है l