गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित श्री श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस में श्रद्धालु भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ कथा का रसपान किया। परम पूज्य गुरुदेव श्री नारायण दास भक्तमाली श्री मामाजी महाराज बक्सर वाले के शिष्य श्याम चरण दास जी महाराज ने अपने मधुर एवं ओजस्वी श्रीमुख से श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
आज की कथा में राजा पृथु एवं प्रचेताओं से संबंधित प्रसंग, उद्धव–गोपी संवाद, श्री गिरिराज पूजन (गोवर्धन पूजा) तथा भगवान श्रीकृष्ण की विविध दिव्य लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम, अनन्य एवं अखंड प्रेम ही सच्ची भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है। उद्धव–गोपी संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि ज्ञान से भी श्रेष्ठ भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण और प्रेम है।
श्री गिरिराज पूजन प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इन्द्र के अहंकार का नाश कर प्रकृति, गौ-सेवा एवं धर्म की महत्ता का संदेश दिया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से गौ-सेवा, धर्मपालन एवं भगवान के नाम-स्मरण को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भजनों एवं संकीर्तन से पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त करते रहे। अंत में भगवान की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ पंचम दिवस की कथा का समापन हुआ।