श्रीराम कथा को आगे बढ़ात हुये बताय श्रीदसरथजी ने अपनी आयु अवस्था देखते हुये अपने गुरु बशिष्ठ से आग्रह किया कि देख हमारी स्थिति अवस्था देखते हुये श्रीराम को अयोध्या का राजतिलक करें।
कान्हाजी महाराज ने बताया कि अपनी दासी मन्थरा के कहने पर कैकेयी ने अपने अपने पुत्र भरत को राज्य और राम को 14 वर्ष का वनवास मांग लिया।
श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वन को चल दिये और अवध में हाहाकर मच गया। लोग रोते विलखते राम के साथ वन को चल पड़े। अन्ततः अवधनासियों को छोड़ कर श्रीराम लक्ष्मन और चानकी केवट की सेवा सहायता से गंगा पार कर वन को चले और रोते बिलखते अयोध्यावासी अवध को लेटे ।
श्रीरात राम विवाह महोत्सव आश्रम में पूज्य महन्त राजराम बाबा जी के सन्निहि में आयोजित उक्त आयेजन लक्सर की कविता दिदी द्वारा ओयेजित रो रहा है।