Tue. Apr 21st, 2026

विजयादशमी महोत्सव का ग्यारहवां दिन..

“दशरथ मरण, भरत मिलाप” प्रसंग का हुआ मंचन”

श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के सफल निर्देशन में ग्यारहवें दिन मंगलवार को देर रात्रि मंचित रामलीला के दौरान “दशरथ मरण, भरत मिलाप” का मंचन किया गया. जिसमें दिखाया गया कि जब मंत्री सुमंत जी प्रभु श्री राम लक्ष्मण एवं सीता को गंगा के समीप छोड़कर लौटते हैं, तो वह काफी दुखित एवं व्यथित रहते हैं. इधर निषाद राज भी लौट रहे होते हैं. उन्होंने मंत्री सुमन्त को दुखित व व्याकुल देखकर उन्हें समझते हैं और उनको सकुशल अयोध्या पहुंचने के लिए उनके रथ पर अपना सारथी उनके साथ लगा देते हैं. मंत्री सुमंत विलाप करते हुए सायं काल के बाद अयोध्या पहुंचते हैं, और महाराज दशरथ से जाकर सारा हाल सुनाते हैं. मंत्री सुमंत की बात सुनकर महाराज व्यतीत हो जाते हैं और पूर्व में घटित श्रवण कुमार की घटना को रानी कौशल्या से जाकर बताते हैं. श्री राम की चिंता में महाराजा दशरथ की हालत काफी बिगड़ जाती है, और उनका देहांत हो जाता है. राजन के देहांत होने की खबर सुनकर गुरु वशिष्ठ जी आते हैं वह एक दूत को भरत को बुलाने के लिए उनके ननिहाल भेजते हैं. भरत जी अपने ननिहाल से आते हैं और वह राम, लक्ष्मण को नहीं देखकर उनके बारे में पूछते हैं. सारा वृत्तांत जानकारी होने पर मां कैकई को नाना प्रकार के वचन सुनाते हैं, और अपने पिता दशरथ जी का अंतिम संस्कार करते हैं. संस्कार के पश्चात भरत जी श्री राम को मनाने के लिए चित्रकूट जाने की तैयारी करते हैं. मार्ग में उनसे निषाद राज जी से भेंट होती है. निषादराज जी उन्हें लेकर प्रभु श्री राम जी के पास पहुंचते हैं. जहां भगवान श्री राम एवं भरत जी का सुंदर मिलन होता है. प्रभु श्री राम को भाई भरत जी से जब यह पता चला कि उनके पिता का देहांत हो गया तो दुखित होते हैं, और नदी के किनारे जाकर पिता को श्रद्धांजलि देते हैं. भरत जी उनसे अयोध्या लौटने की बारंबार विनती करते हैं परंतु श्री राम पिता के वचनों द्वारा वचनबद्ध होने की बात कह कर लौटने से इनकार कर देते हैं, और भरत जी पर कृपा करते हुए अपनी चरण पादुका प्रदान करते हैं.भरत जी चरण पादुका को लेकर अयोध्या लौटते हैं और राज सिंहासन में पादुकाओं को स्थापित कर देते हैं. यह दृश्य देखकर दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं.
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