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नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन(एनडीएचएम) के पहले स्टेरिंग ग्रुप की बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार एवं उत्तर प्रदेश के जिलों को भी पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करने का दिया सुझाव

  • दिल्ली में हुई पहली बैठक।
  • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आईटी आयुष मंत्रालय के मंत्री सहित अन्य एक्सपर्ट जुड़े।
    केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के पहले स्टेरिंग ग्रुप की बैठक में बिहार एवं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों के कुछ जिलों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत शामिल करने का सुझाव दिया है। मौजूदा समय में नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के अंतर्गत 6 केंद्र शासित राज्यों में डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने संबंधित कार्य पायलट प्रोजेक्ट के तहत चल रहा है। बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने सुझाव दिया कि बिहार और उत्तर प्रदेश बड़े राज्य हैं, यहां के जिलों को पायलट प्रोजेक्ट में शामिल करने से इस काम में लगी एजेंसी को व्यापक अनुभव मिलेगा। जिसका फायदा सभी राज्यों को होगा।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को एक तोहफा देते हुए लाल किले के प्राचीर से नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की शुरुआत की घोषणा की थी। जिस पर आज युद्ध स्तर से काम हो रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन, भारत के स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति लेकर आएगा। राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन को चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, पुदुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में पायलट मोड पर शुरू किया है। बैठक में सुझाव देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि इस संबंध में मेरा एक सुझाव है कि पायलट फेज में ही कुछ बड़े राज्यों के कुछ जिलों और मेडिकल कालेजों को शामिल करना चाहिए । केंद्र शासित प्रदेश और राज्यों दोनों को पायलट फेज में शामिल करने से हमें बेहतर सीख मिलेगी, जो बाद में पूरे देश में इसे लागू करते समय उपयोगी सिद्ध होगी। खास तौर पर बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के कुछ जिले जरूर इसमें शामिल करने चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने बताया कि बक्सर एवं भागलपुर में प्रयोग के तौर पर व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाने का कार्य शुरू हुआ है। विधानसभा चुनाव के पहले दोनों जगहों पर कार्य शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि बिहार में स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए भी डिजिटल हेल्थ कार्ड के ऊपर काम करने का प्रयास किया था। बदलते आधुनिक परिवेश में डिजिटल हेल्थ कार्ड स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लेकर आएगा। 2017 की स्वास्थ्य नीति के अनुसार देशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए केंद्र सरकार कृत संकल्पित है। इसे ध्यान में रखकर डिजिटल हेल्थ कार्ड अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। पहली स्टेरिंग ग्रुप ऑफ मीटिंग में स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्ष वर्धन, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, आयुष राज्य मंत्री श्रीपद नाईक, नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार विजय राघवन, स्वास्थ्य परिवार कल्याण सचिव राजेश भूषण ,इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अजय साहनी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी गण शामिल हुए।

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