।।श्रीवामनद्वादशीव्रतम्।। (वामन द्वादशी व्रत निर्णय:)
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इस वर्ष श्रीवामन द्वादशी(वामनावतार)निर्विवादत: दिनांक
26-9-2023दिन मंगल वार को ही मनाया जाएगा।
यह द्वादशी तिथि श्रवण नक्षत्र से युक्त सूर्योदय वाली होने के कारण अत्यन्त शुभद मुहूर्त है। यही विजया द्वादशी मनोवाञ्छित फल दायक है । यह व्रत सभी को करना चाहिए ।
श्रोणायांश्रवण द्वादश्यां मुहूर्तेsभिजितिप्रभु:।।
सर्वे नक्षत्र ताराद्याश्चक्रुस्तज्जन्म दक्षिणम् ।
द्वादश्यां सवितातिष्ठन्मध्यंदिनगतो नृप ।
विजया नाम सा प्रोक्तायस्यांजन्मविदुर्हरे:।।
भागवत महापुराण 8-18-4,5 मंत्र द्रष्टव्य।
इस वर्ष यह विजया द्वादशी का पूर्ण योग है।
यह व्रत एकादशी की तरह नित्य है ।
मानव मात्र को यह व्रत करना चाहिए।क्योंकि यह व्रत शान्ति व समृद्धि का दाता हे। वामन का अहिंसावतार सर्वोपासकावतार भी है।
इस धरा पर नारायण का पन्द्रहवां अवतार वामन के रुप में हुआ है । जब कि मानव के रुप में ग्यारहवां अवतार है। नारायण वामन से पूर्व नव बार पुरुष तथा एक बार स्त्री के रूप में अवतार ग्रहण कर लिये थे।
ग्यारहवें मानव अवतार में वामन रुप धारण किये हैं।
विश्व में शान्ति स्थापित करने वाला हरि का यह ११वां वामनावतार (अहिंसा परमो धर्म:) का मार्ग दर्शन है। श्रीराम ११००० साल व श्रीकृष्ण १२८ संवत् में कठिनतम प्रयास से जो कार्य किये उस कार्य को श्रीवामन ने मात्र ४८ मिनट में विना संग्राम कर के लोक में अमन चैन स्थापित कर दिया ।
यह व्रत मध्य दिवस तक का व्रत है। सर्वोपासनीय है।
सौभाग्य का विषय है कि भगवान नारायण बक्सर में ही वामन बन कर अवतरित हुए । यह बक्सर वामन की जन्म भूमि है।
हम सभी बक्सर वासी अपने भगवान वामन की भव्य एवं दिव्य
शोभा यात्रा (श्री वामन चेतना मंच वामन आश्रम धाम बक्सर )
के वैनर तले विगत वर्ष की भांति इस वर्ष भी निकालने का निर्णय लिए हैं। २६ सितम्बर दिन मंगलवार को यह आध्यात्मिक यात्रा श्री रामेश्वर नाथ मंदिर से प्रारम्भ होगी हम सभी धर्मावलम्बी जन सपरिवार इस यात्रा में सम्मिलित होकर अपने प्रभु को प्रसन्न कर स्वयं को धन्य बनाएंगे।
आपका पौराणिक ।