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विजयादशमी महोत्सव का आठवां दिन..

“लक्ष्मण परशुराम संवाद का हुआ मंचन”

श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के निर्देशन में आठवें दिन शनिवार को देर रात्रि मंचित रामलीला कार्यक्रम के अन्तर्गत सातवें दिन “लक्ष्मण परशुराम संवाद” प्रसंग का विधिवत मंचन किया गया. जिसमें दिखाया गया कि जब श्री राम जी धनुष का खंडन करते हैं, तब सभागार में परशुराम भी आते हैं. और शिव का धनुष टूटा हुआ देखकर काफी क्रोध करते हैं. वह सभा कक्ष में बैठे सभी योद्धाओं को ललकारते हैं और धनुष का खंडन करने वाले दोषी को दंड का ऐलान करते हैं. इस बात पर लक्ष्मण जी और परशुराम जी का भव्य संवाद होता है. संवाद रोकने के लिए श्री रामचंद्र जी हस्तक्षेप करते हैं, और परशुराम जी को अपनी छाती पर अंकित भृगु ऋषि के चरण का चिन्ह दिखाते हैं. तब परशुराम जी का संदेह दूर हो जाता है. और प्रभु श्री राम के चरणों में अपना आयुध समर्पण कर वन में तप को चले जाते हैं. इधर राजा जनक अपने दूतों को निमंत्रण देकर अयोध्या पुरी भेजते हैं. तब महाराज दशरथ बारात लेकर आते हैं और श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न चारों भाइयों का धूमधाम से विवाह होता है. जब बारात लौटकर अयोध्या पुरी आती है तो पूरे अयोध्यावासी मंगल मनाते हैं. और माताएं परछन करती है.
उक्त लीला का दर्शन कर रहे दर्शक चारों भाईयों का जयघोष करते हैं.
लीला मंचन के दौरान आयोजन समिति के बैकुण्ठ नाथ शर्मा, सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

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