Wed. Apr 22nd, 2026

संपूर्ण सृष्टि जिस अदृश्य शक्ति से संचालित ,पालित एवं संधारित होती है उस अलक्ष्य तेज पुंज का नाम विभिन्न धर्म एवं मतावलंबी जनों द्वारा अलग-अलग रखा गया है ।सनातन धर्म ने उस शक्ति को ब्रह्म या भगवान कहा है। वह ब्रह्म जब संसार में प्रत्यक्ष देखा जाने लगता है तब हम अवतार कहते हैं और यह प्रत्यक्षीकरण उस ईश्वर की इच्छा पर निर्भर है कि कब किस रूप में वह देखा जाएगा ।कभी कच्छ, मछली, नरसिंह, राम, कृष्ण इत्यादि अनेक रूपों में संसार को दर्शन प्राप्त होते रहे हैं ।यह विभिन्न रूप संसार की आवश्यकता के अनुसार ही ईश्वर ने धारण किया है यही उनकी परम करुणा है। अवतार करुणा एवं दया कृपा का ही प्रतिफल है। ईश्वर का अवतार वस्तुतः संपूर्ण सृष्टि में भयमुक्त एवं लोभ रहित कर्मनिष्ठ तथा निरापद उपकारी महामानव संयुक्त समाज का निर्माण कर पृथ्वीपर सर्वोत्तम लोक के रूप में प्रतिष्ठित करना है। यही कारण है कि संपूर्ण संसार के देव, दानव,गंधर्व आदि मानवेतर श्रेष्ठ योनियों को यह बताना है कि नर तन के समान कोई दूसरा तन नहीं है ।भगवान स्वयं ही राम एवं कृष्ण बन कर आदर्श पुरुष का आचरण करते हुए मानव समाज को मानवता का उपदेश दिए हैं। भगवान ने रामावतार में एक मर्यादा जनित मानव समाज की स्थापना हेतु प्रभु श्रीराम ने 13000 वर्षों तक पृथ्वी पर निवास किया। कालांतर में जब मानव मूल्यों का ह्रास होने लगा तो पुनः श्री कृष्ण के रूप में नारायण का अवतार हुआ और पृथ्वी पर 128 वर्षों तक धरा पर निवास करके श्री कृष्ण द्वारा मानवता का विस्तार किया गया। श्री कृष्ण ने धर्म -अधर्म, न्याय -अन्याय की परिभाषा बताई। उन्होंने भीष्म ,द्रोणाचार्य ,शैल आदि का स्वयं की उपस्थिति में वध कराकर संसार को एक नई दृष्टि प्रदान की ।उन्होंने बताया कि प्रवचन एवं वेशभूषा तथा रूप में धर्म का लक्षण दिखाई दे और आचरण में नहीं तो उसे मानव समाज का शत्रु ही मानना चाहिए ।ऐसे धर्मात्मा जो अधर्म वृद्धि एवं अधर्मी के काम को आए को शत्रु और अधर्मी ही मानना चाहिए। श्री राम ने भी रावण का वध इसलिए किया कि वह सन्यासी बनकर स्त्री हरण का कार्य किया था। अतः हमें उस अदृश्य शक्ति द्वारा प्रदत शास्त्रों, वेदों ,पुराणों, स्मृतियों एवं विभिन्न अवतारों से संपूर्ण मानवीय कृतियों का ज्ञान प्राप्त कर अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए ।इसीलिए श्रीमद्भागवत आत्म कल्याण की संहिता है ।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!