Wed. Apr 22nd, 2026

जिले की प्रसिद्ध पंचकोसी यात्रा शनिवार से शुरू हो रही है। इसके लिए जिला प्रशासन व पंचकोसी यात्रा समिति ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। पंचकोसी परिक्रमा कृष्णपक्ष की पांचवीं तिथि से शुरू होती है, जो अगले पांच दिनों तक चलती हैं। इस संबंध में समिति के अध्यक्ष बसांव मठ के महंत अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने बताया कि 5 दिसंबर से शुरू होने वाली पंचकोसी यात्रा 9 दिसंबर को समाप्त होगी। भगवान राम तत्कालीन समय में पांच ऋषियों के आश्रम पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया था तथा रात्रि विश्राम के समय भोजन रूप में जिन व्यंजनों को ग्रहण किये थे। उस व्यंजनों को लोग आज प्रसाद रूप में ग्रहण करते हैं। पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत ऐतिहासिक, आस्था की नगरी एवं धार्मिक मान्यता वाले घाट रामरेखाघाट पर स्नान एवं भगवान रामेश्वर जी की पूजा अर्चन से शुरू होगी। उसके बाद श्रद्धालु अहरौली से परिक्रमा शुरू करेंगे। परिक्रमा का समापन बक्सर के चरित्रवन में समाप्त हो जाता है। पंचकोसी परिक्रमा नाम के अनुरूप ही पांच कोसों की दूरी में ही यात्रा पूरी की जाती है। परंपरा के मुताबिक पंचकोसी परिक्रमा को पैदल ही चल कर पूरा करने की परंपरा कायम है। परिक्रमा मेले में आये श्रद्धालु पांच अलग-अलग जगहों पर अपना पड़ाव बनाते हैं।

प्रसाद ग्रहण कर श्रीराम ने किया था रात्रि विश्राम
पंचकोसी यात्रा के संबंध में समिति के सचिव डॉ रामनाथ ओझा ने बताया कि पंचकोसी परिक्रमा त्रेता युग से कायम है। भगवान श्री राम त्रेता युग में विश्वामित्र की यज्ञ को पूर्ण कराने एवं ताड़का की वध करने के उपरांत नगर के पांच ऋषि-मुनियों के पास गये थे। सभी ऋषि-मुनियों के पास प्रसाद ग्रहण किये थे तथा रात्रि विश्राम किये थे। इसी मान्यता के अनुरूप आज भी यह प्राचीन परंपरा कायम है। पंचकोसी परिक्रमा को करने से पुण्य, सामाजिक समरसता व प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना बढ़ती है। इससे मन में पवित्रता आती है। निर्धारित तिथि के अनुसार तय रूटों से होते हुए बसांव मठिया पहुंचेगी, जहां साधु-संतों की विदाई देकर यात्रा की समाप्ति की जायेगी। इसको लेकर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किये गये हैं। निर्धारित रूटों पर सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को भी शिविर लगाने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि त्रेतायुग से यह परंपरा चली आ रही है। पंचकोसी परिक्रमा पांच विभिन्न स्थलों पर आयोजित की जाती है। सभी आयोजन स्थलों पर मान्यता के अनुसार रात्रि विश्राम किया जाता है और प्रसाद ग्रहण किया जाता है।

अहिरौली में आयोजित किया जाएगा भव्य कार्यक्रम
मेला के पहले दिन अहिरौली में भव्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रशासन व ग्रामीणों के सहयोग से पूरे गांव में सफाई अभियान चलाया गया जो भी नाली या नाला गंदा था उसकी सफाई की गई है। अहिल्या माता के मंदिर का रंग-रोगन किया गया है। गांव में बिजली के जो भी जर्जर तार थे। उन्हें बदला जा रहा है। ताकि कोई भी इसकी चपेट में नहीं आए। बाहर से आये श्रद्धालुओं की सेवा यहां के गांव के लोग करते है। पहले दिन पुआ-पूडी व सब्जी बनायी जाती है। इस संबंध में पंचायत के पूर्व मुखिया ब्रजकिशोर उपाध्याय ने बताया कि एसडीओ केके उपाध्याय के सहयोग से समय रहते सभी कार्य को पूरा कर लिया गया है।

मंदिर में अहिल्या मां की प्रतिमा।

रंगाई पुताई किया गया अहिल्या मंदिर।

अहिरौली पड़ाव स्थल पर सफाई में जुटे लोग।
सदर एसडीओ केके उपाध्याय ने पंचकोसी मेला में आये श्रद्धालुओं की मदद के लिए तैनात रहेंगे। इसके साथ पुलिस कर्मियों को भी नियुक्त किया गया हैं। वहीं जिन स्थानों में मेला के दौरान श्रद्धालु रात्रि विश्राम करेंगे। उस क्षेत्र के थानाध्यक्ष को निर्देश दिया गया है कि रात्रि के समय वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाये। ताकि कोई भी चोर या उचक्का उन्हें परेशान नहीं कर सके। वहीं मेला के अंतिम दिन बक्सर में भारी संख्या में भीड़ आती है। इसलिए अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की गई है आने वाले श्रद्धालुओं की मदद करे। एसडीओ ने पीडब्लूडी विभाग के कार्यपालक अभियंता को निर्देश देते हुए कहा कि जिन मार्गों से श्रद्धालु गुजरेंगे। उन्हें त्वरित ठीक किया जाए । जिससे उन्हें परेशानी नहीं हो। वहीं बिजली कंपनी के कार्यपालक अभियंता को निर्देशित करते हुए कहा क जहां रात्रि विश्राम होगा। वहां बिजली व रोशनी की व्यवस्था की जाए । यदि इस कार्य में जरा सी लापरवाही होगी। तो कार्रवाई की जायेगी। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि मेला के दौरान चलंत शौचालय की व्यवस्था की जाए।

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