

।कलश यात्रा (शोभायात्रा) का महत्व।
ईश्वर प्राप्ति के जितने भी साधन हैं उनमें प्रदक्षिणा सर्वोत्तमोत्तम साधन माना गया है । जितनी प्रदक्षिणाएं शास्त्र में वर्णित हैं उनमें शोभा यात्रा को सर्व श्रेष्ठ माना गया है। शोभा यात्राएं भी बहुत हैं उन सभी में यज्ञ की शोभा यात्रा को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है। यज्ञ कर्ताओं द्वारा यज्ञ की शोभा यात्राएं विभिन्न समयों में निकाली जा रही हैं। किन्तु शास्त्र के अनुसार मध्याह्न काल के पूर्व ही जल भरी का कार्य सम्पन्न करना उत्तम माना गया है । अंततः यह सिद्ध हुआ कि प्रातः कालन की यज्ञ भगवान की शोभा यात्रा सर्वोत्तमोत्तम परिक्रमा है।
वेद ने —-परिक्रमा को चरणों से होने वाली ईश्वर की उत्तम पूजा के रूप में माना है ।
यजुर्वेद —-ये तीर्थानि प्रचरन्ति सृका हस्ता निषंगिण़: तेषां सहस्र योजनेव धन्वानि तन्मसि।।
पुराणों में— सर्वाणि यानि पापानि जन्मान्तर कृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्ति–
उपरोक्त मंत्रों का कथन है कि नियमानुसार की गई यज्ञ नारायण की शोभा यात्रा मानव को धर्म,अर्थ,काम,और,मोक्ष, चारों पुरूषार्थों को प्रदान करती है ।हम सभी बक्सर वासी जन बड़े भाग्यशाली होंगे कि ३८ वर्षों में प्राप्त होने वाले इस पुरुषोत्तम मास में कल दिन रविवार दिनांक ६अगस्त को
रामरेखा घाट रामेश्वर नाथ मंदिर से प्रातः काल ७ बजे से निकलने वाली शोभा यात्रा के साक्षी व सहभागी बनकर मानव जीवन को धन्य बनाएगें।
सर्व जन कल्याण सेवा समिति आपसभी धर्मानुरागी नगर वासियों से गुजारिश करती है कि सपरिवार नगर भ्रमण में सम्मिलित होकर पूण्य लाभ प्राप्त करें। यदि इस बार चूक हो गई तो पछताने के सिवा कुछ हाथ नहीं लगेगा। क्योंकि यह मुहुर्त पुनः २०४२ में अर्थात् १९ वर्ष बाद मिलेगा।
अतः समिति पुनः निवेदन करती है कि कल रविवार ६ अगस्त को रामरेखा घाट रामेश्वर नाथ मंदिर पर सुबह ६ बजे पहुंच कर जीवन को कृतार्थ करने की कृपा करें।
निवेदक—-सर्वजनकल्याणसेवासमितिसिद्धाश्रमधामबक्सर।
दिनांक ०५-०८-२०२३