रामराज एक सपना है या सत्य अत्यंत विचारणीय प्रश्न हैl क्या हम आज रामराज की स्थापना कर सकेंगे, रामराज की स्थापना सर्वप्रथम विचार की भूमि पर होती हैl विचार में राम राज्य सिद्ध हो जाए तब आचरण में राम राज्य का क्रियान्वयन संभव है जब आचरण राम राज्य से परिनिष्ठ हो जाए तब प्रवचन में रामराज होना चाहिएl तत्पश्चात जन सामान्य में राम राज्य की परिकल्पना साकार होगी अन्यथा रामराज स्वप्न मात्र ही रहेगी अथवा किताब के पन्नों में जैसा की है वैसा ही रहेगा lवर्तमान समय में रावण का मन हृदय रावण की सोच एवं रावण का आचरण करने वाले कपट पारायण लोग राम जैसा प्रवचन करके रामराज की स्थापना करने की बात कह रहे हैं जो सर्वथा हास्यास्पद ही नहीं असंभव भी है l जिस मानव के जीवन में धन धर्म द्वारा नियंत्रित है तथा काम मोक्ष द्वारा वशीकरण है वही मानव आत्मा अर्थ को धर्म से, काम को मोक्ष से , स्ववश करके अपने अंत में रामराज की स्थापना कर सकेगाl इस घोर कलयुग में मानव समाज की सबसे बड़ी विडंबना है कि वह धन ,पद एवं प्रतिष्ठा का गुलाम मात्र हैl परिणामत: धर्महीन जीवन असीम कामनाओं के आवर्त में मोक्षhin विचार के कारण नाना प्रकार के दुखों एवं शोकों से संतप्त होकर बार-बार जन्म मरण के भयंकर भट्टी में तपता एवं जलता रहता हैl जब तक मानव मन छल, कपट, प्रपंच ,काम ,क्रोध ,लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्यlहीन होकर निर्मलता पूर्वक धर्म का आश्चर्य सत्य का सानिध्य प्राप्त नहीं करेगा तब तक अर्थ काम दोनों विशुद्ध नहीं होंगेl जब तक अर्थ एवं कम शुद्ध नहीं होंगे तब तक रामराज की परिकल्पना जाग्रत स्वप्न मात्र होगा एवं मोक्ष असंभव रहेगl यदि संसार को राम राज्य चाहिए तो मानव समाज श्री राम के आदर्शों पर चलने का संकल्प करें क्योंकि रावण राज्य एवं राम राज्य दोनों को कारक मन हृदय आचरण एवं प्रवचन है इसका मुख्य कारक अंत:करण चतुष्टय है मन, बुद्धि ,चित एवं अहंकार l विशुद्ध अंत रस की भूमि में रामराज की सृष्टि होती है तथा अंतरस की मलीनता में रावण राज्यl हमें श्री राम के चरित्र से यह शिक्षा लेनी चाहिए कि अंत: की शुद्धता के द्वारा अंत: की मलीनता को समाप्त करना ही राम के द्वारा रावण पर विजय और राम के द्वारा रावण राज्य को समाप्त कर रामराज की प्रतिस्थापन है lयही है राम राज्य का रहस्यl श्री राम राज्य व्यक्ति से प्रारंभ होता है ना कि समाज से आज व्यक्ति मात्र रावण राज्य की भूमिका को जीने लगा है यही कारण है कि राम राज्य संभवहीन है l सर्वजन कल्याण सेवा समिति द्वारा यह 16वां धर्म आयोजन आज दिनांक 30.6.2024 को विशाल भंडारा, भोजन ग्रहण एवं प्रसाद वितरण के साथ पूर्ण हुआl प्रातः काल 6:00 बजे से 9:00 बजे तक यज्ञ मंडप में 33 कोटी के देवी देवताओं का पूजन एवं हवन किया गया पुनः पूर्णाहुति प्रदान करके समिति के सदस्य एवं यजमानों द्वारा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी धर्म आयोजन को विश्व कल्याण अर्थ पूर्ण किया गयाl तत्पश्चात संत महात्मा विद्वान समाज का बहुमlन एवं प्रसाद ग्रहण संपन्न हुआl दिन के 2:00 से 4:00 तक श्री राम राज्याभिषेक एवं श्री राम राज्य का भाव वर्णन द्वारा कथा हुई lकथा परांत श्री रामायण जी की आरती, व्यास गद्दी पूजन तथा विशाल भंडारा का कार्य प्रारंभ हुआl विगत धर्म योजना की भांति इस वर्ष भी हजारों भक्त नर नारी साधु संत महाजन महापुरुषों ने भोजन प्रसाद ग्रहण कियाl देर रात तक भंडारा चलता रहा lश्रद्धा भक्ति से लोग प्रसाद प्राप्त करते एवं ग्रहण करते रहेl समिति के अपने संकल्प अनुसार यह 16वां महान धर्म आयोजन भी 30 जून 2024 दिन रविवार को पूर्ण हुआl
