Sun. Apr 19th, 2026

वैज्ञानिकों ने मौके पर किया समाधान
दो दिवसीय किसान वैज्ञानिक वार्तालाप संपन्न
बक्सर: कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण(आत्मा)बक्सर के तत्वावधान में दिन बुधवार को दो दिवसीय किसान वैज्ञानिक वार्तालाप कार्यक्रम संपन्न हो गया। वार्तालाप के दूसरे दिन जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने कहा कि किसान एवं वैज्ञानिक को एक मंच पर लाने का कार्यक्रम है, जिसमें किसान रबी मौसम में उगाई जाने वाली फसलों का प्रबंधन से संबंधित समाधान से अवगत होते हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम को किसानों के लिए मिल का पत्थर बताया। वार्तालाप में उपस्थित केवीके के शष्य विशेषज्ञ डाॅ. मंधाता सिंह ने कहा कि दलहन एवं तेलहन की बुवाई प्रारंभ है। इसके आशातीत उत्पादन हेतु किसान समय से पंक्तिबद्ध तरिके से बुवाई करें। बुवाई के पूर्व अनिवार्य रुप से बीज उपचार करें, ताकि बीज जनित रोग नहीं लगे। उन्होंने उर्वरक पर चर्चा करते हुए कहा कि संतुलित मात्रा में उर्वरक का प्रयोग लाभदायक सिद्ध होता है। इस हेतु सूक्ष्मपोषी तत्व एवं मिश्रित उर्वरक का इस्तेमाल करें। खरपतवार प्रबंधन हेतु पेंडीमेथलीन दवा का प्रयोग प्रशिक्षित विशेषज्ञ के अनुशंसा पर करें। केवीके के पादप रोग विशेषज्ञ श्री रामकेवल द्वारा रबी मौसम में उगाई जाने वाली फसलों में कीट-ब्याधि प्रबंधन पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने समेकित कीट-ब्याधि प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, जैविक खेती के नुस्खों से किसानों को अवगत कराया। वार्तालाप में उपस्थित किसान श्री महेश पाण्डेय ने गेहूॅं की खेती के दौरान गेहूॅं का मामा खरपतवार उगने की समस्या बताई। उन्होंने कहा कि गेहूॅं के मामा के कारण गेहूॅं की अच्छी पैदवार नहीं हो पाती है। इस समस्या का समाधान करते हुए श्री रामकेवल ने बताया कि गेहूॅं का मामा जिसको वैज्ञानिक भाषा में फेलेरिस माईनर कहा जाता है, गेहूॅं का बड़ा दुश्मन है। इससे निजात पाने हेतु किसान क्लोडिनोफाॅप प्रोपरजाईल पन्द्रह प्रतिशत डब्लू पी या सल्फोसल्फ्यूरान का प्रयोग वैज्ञानिक के अनुशंसा पर करें। प्रगतिशील कृषक शालीग्राम दूबे द्वारा समस्या बताया गया कि गेहूॅं की पहली पटवन में मेरे द्वारा भरपूर उर्वरक देने के बावजूद आशातीत उत्पादन नहीं होता है। इस पर वैज्ञानिकों ने बताया कि गेहूॅं फसल की संपूर्ण अवधि के दौरान चार पटवन में संतुलित मात्रा में उर्वरक का इस्तेमाल करें। एक बार में ही अत्यधिक मात्रा में उर्वरक के इस्तेमाल से फसलों में रोग-ब्याधि के साथ-साथ आर्थिक नुकशांन भी होता है एवं पैदवार में कमी आती है। मौके पर प्रगतिशील कृषक महेश पाण्डेय, शालीग्राम दूबे, सच्चिादानंद शर्मा, फारुक अंसारी, मंजू देवी, सोनी देवी, रमेश मल्लाह, अमरेन्द्र कुमार सिंह, श्री कृष्ण सिंह ललन राम, लालजी प्रसाद, भरत सिंह, उमेश कुमार राम, सुरेश कुमार सिंह, सरयू सिंह, योगेन्द्र कुमार सिंह, रामयश राम सहित अन्य कृषक उपस्थित थे।

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