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पूतला दहन से पूर्व रावण और मेघनाथ के पूतले से दिखा कोल्ड फायर का अद्भुत नजारा

प्रभु श्रीराम ने बाण मारकर रावण को किया धरासायी.

रावण वध के साथ असत्य पर सत्य की हुई जीत.

नगर के ऐतिहासिक किला मैदान में श्री रामलीला समिति द्वारा आयोजित 22 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के दौरान गुरुवार को “रावण वध” कार्यक्रम का आयोजन किया गया. ‘रावण वध’ कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के सचिव बैकुंठनाथ शर्मा व संचालन कोषाध्यक्ष सुरेश संगम ने किया. वहीं धन्यवाद ज्ञापन समिति के संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने किया. इस दौरान पूरा किला मैदान दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था. मैदान के एक कोने में रावण का 45 फीट ऊंचा पुतला तथा उसके बगल में 40 फीट ऊंचा मेघनाथ का पुतला बनाया गया था, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा. शाम ठीक 5.28 बजे प्रभु श्रीराम ने रावण के विशालकाय पुतले को निशाना बनाकर बाण छोड़ा. नाभि में बाण लगते ही रावण का पुतला कलात्मक आतिशबाजी के साथ धू धू कर जलने लगा और देखते ही देखते क्षण भर में जलकर खाक हो गया. इसके ठीक 10 मिनट पहले श्रीराम के अनुज लक्ष्मण द्वारा मेघनाथ का वध करते हुए विशालकाय पूतले का दहन किया गया. कलात्मक आतिशबाजी से पुरा रामलीला मैदान जगमग हो उठा।

 

मेघनाथ व रावण का वध होते ही पटाखों के आवाज के बीच पुरा परिसर जय श्रीराम की जयघोष से गूंज उठा. इस दौरान लाखों लोग किला मैदान में रावण वध का गवाह बने. ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे मैदान में तील रखने की भी जगह न हो। रावण वध से पहले जमकर आतिशबाजी हुई. पुरा कार्यक्रम सीसीटीवी कैमरे व जिला प्रशासन के चौकसी एवं कड़ी निगरानी में किया गया।

 

इसके पूर्व 2 बजे दिन में “रावण वध” के प्रसंग का मंचन वृंदावन से पधारे श्री राधा माधव रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री सुरेश उपाध्याय “व्यास” जी के सफल निर्देशन में किया गया। जिसमें दिखाया गया कि कुंभकरण के मृत्यु के बाद भी रावण का अहंकार कम नहीं हुआ, वह अपने पराक्रमी पुत्र मेघनाथ को रणभूमि में भेजता है, जहां लक्ष्मण एवं मेघनाथ के बीच जमकर युद्ध होता है.

युद्ध के दौरान मेघनाथ ने अपने मायाजाल से लक्ष्मण जी को काफी परेशान किया. अंत में क्रोधित होकर लक्ष्मण ने अपने तीर से मेघनाथ का सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया. इसके बाद मेघनाथ की पत्नी सुलोचना भी पति का सिर गोद में लेकर सती हो जाती हैं. पुत्र की मौत का समाचार सुन रावण को गहरा आघात लगाता है. तब मंदोदरी भी रावण को खुब समझाती है, पर रावण ने अपनी जिद्द नहीं छोड़ी और सेना के साथ खुद युद्धभूमि में उतर पड़ता हैं. इस दौरान श्रीराम व रावण के बीच जमकर युद्ध हुआ. श्रीराम ने रावण का वध करने का अथक प्रयास किया, लेकिन काफी प्रयास के बावजूद भी वह सफल नहीं होते, तब अंत में विभिषण के कहने पर श्रीराम ने रावण के नाभिकुंडल में बाण मारा जाता हैं. और हाहाकार करते हुए रावण की मौत होती हैं.

इस मौके पर समिति के सचिव बैकुंठ नाथ शर्मा, संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता, कोषाध्यक्ष सुरेश संगम, लाईसेंसदार कृष्ण कुमार वर्मा , रोहतास गोयल, बबन सिंह, प्रदीप दूबे, ज्ञान प्रकाश ओझा, अमरेन्द्र पाण्डेय, वर्षा पाण्डेय, पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्रा, निर्मल गुप्ता, केदारनाथ तिवारी, मदन जी दूबे, कमलेश्वर तिवारी, रामस्वरूप अग्रवाल, डा० श्रवण कुमार तिवारी (रेडक्रास), उदय कु० सर्राफ उर्फ जोखन, राजकुमार गुप्ता, राजेश चौरसिया, वृजमोहन सेठ, प्रियेश के अलावे जिलाधिकारी, एसपी, सदर एसडीएम, डीएसपी, सहित प्रशासन के सभी आला अधिकारी, प्रतिष्ठित व्यवसाई, समाजसेवी व मीडिया कर्मी, मुख्य रूप से मौजूद रहे!

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