श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में सत्रहवें दिन सोमवार को वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के सफल निर्देशन में कृष्ण लीला के दौरान “कंश वध” चरित्र के प्रसंग का मंचन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि श्री कृष्ण अक्रुर जी के साथ यमुना बाग में ठहरते है. इस बात की सूचना कंस को मिल जाती है वह अपने सभा में परामर्श कर श्री कृष्ण को मारने के लिए ठुठा धोबी को भेजता है. कृष्ण धोबी को मारकर आगे बढ़ते हैं जहाँ माली उन्हें माला पहनाकर स्वागत करता है. श्री कृष्ण आगे बढ़कर बाजार में उत्पात मचा रहे कुबलिया पीड़ हाथी को मारते है. वहाँ से आगे बढ़ते हुए श्रीकृष्ण धनुष का खण्डन करते हैं. वहाँ कंस के योद्धा श्रीकृष्ण को मारने के लिए आते हैं. परन्तु सभी योद्धा श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे जाते हैं. अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाते हैं .कंस वध के बाद श्रीकृष्ण अपने माता-पिता वसुदेव और देवकी को कारागार से मुक्त कराते हैं, साथ ही कंस के द्वारा अपने पिता उग्रसेन महाराज को भी बंदी बनाकर कारागार में रखा था, उन्हें भी श्रीकृष्ण ने मुक्त कराकर मथुरा के सिंहासन पर बैठाते है.
उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है. लीला के दौरान पुरा परिसर दर्शकों से खचाखच भरा रहता है.