सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम बक्सर द्वारा आयोजित 18वां धर्म आयोजन पंचम दिवस की श्रीमद्भागवत कथा- धर्मशास्त्र का दूसरा नाम कर्म शास्त्र है सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि धर्म ही कर्म तथा कर्म ही धर्म है lश्रीमद् भागवत में मुख्य रूप से श्री हरि के कृष्ण अवतार की कथा है जो कृष्ण की कथा भागवत में बताई गई है वह यदुवंश में आज से 5260 वर्ष पूर्व मथुरा के राजा कंस के कारागार में देवी देवकी के गर्भ से जन्म लिए थे l जब धर्म की आड़ में अधर्म होने लगे तथा तर्क द्वारा अधर्म को धर्म सिद्ध किया जाने लगा तब वह कथित धर्म ही पाप कर्म अर्थात धर्म की ग्लानी कहा जाता है l जरासंध दुर्योधन शकुनी दुशासन आदि सभी के लिए सनातन धर्मावलंबी है, धनवान बलवान भी हैं तथा इनका कुल तथा वंश भी महान है किंतु इन्हें पापी एवं अत्याचारी कहा जाता है जबकि यह सभी भगवान शिव सूर्य पवन वरुण आदि देवताओं के उपासक ही नहीं इनके प्रत्यक्ष दर्शन भी किए हैं फिर भी इन्हीं कंस आदि के वध के लिए भगवान को श्री कृष्ण के रूप में अवतरित होकर इन सभी का नाश करना पड़ा l इसका मूल कारण बताया गया है कि जब-जब धर्म की हानि अधर्म का उत्थान होता है तब तब ईश्वर का अवतार होता हैl साधुओं की रक्षा राक्षसों का विनाश सनातन धर्म की पुनः स्थापना करता है यही अवतार का प्रयोजन हैl यहां गहराई से विचार करने पर पता चलता है कि यह राक्षस जिनका वध भगवान करते हैं सभी के सभी किसी न किसी देवता के भक्त ही हैं तो पुनः इन्हें राक्षस क्यों कहा जाता है इसका कारण स्पष्ट है कि जब तपस्या द्वारा प्राप्त शक्ति स्वार्थ के लिए कार्य करने लगे तथा परमार्थ की हानि करते हुए सर्वजन के लिए दुखदायी बनकर मनमानी धर्माचरण होने लगे तो वह मिथ्या धर्मचारी समर्थ राक्षस बन जाता है और वह सनातन धर्म तथा मानव समाज के लिए अभिशाप बनकर घातक बन जाता है l कंस आदि ने यही आचरण किया था परिणाम हुआ की परम शिष्य भक्त होने के बाद भी नारायण द्वारा मारे गए l आज भी समाज में ऐसा कार्य बहुत लोग कर रहे हैं साधु, कथावाचक, सन्यासी, त्रेडंडी ,संत ,महंत बनकर समाज में धर्मात्मा होने का विश्वास जीत कर स्वयं को स्थापित कर लेते हैं पश्चात समाज को गलत मार्ग पर ले जाते हैं धर्म के नाम पर षड्यंत्र के तहत भयंकर मद्य विनाशकारी पाप करते हैं l समाज की संपत्ति, समय, संस्कार आदि का सत्यानाश करके एक गलत परंपरा लागू कर सनातन धर्म को विनाश करने का मार्ग भी प्रशस्त कर देते हैं l इस विषमतम स्थिति में श्रीमद् भागवत कथा ही ऐसे पाखंडी धर्मात्माओं से समाज की रक्षा करेगी जैसे भगवान श्री कृष्ण ने कंस आदि का वध करके सनातन धर्म की रक्षा की वैसे ही भागवत कथा ऐसे कालनेमि धर्मात्मा एवं कथावाचकों से समाज को रक्षा करके सनातन धर्म की स्थापना करेगी l कलयुग में यह भागवत प्रत्यक्ष श्री कृष्ण के रूप में विद्यमान है l