Mon. Apr 20th, 2026

रामायण में श्री राम कथा के पूर्व ही शिव पार्वती की कथा आती है lभारद्वाज जी ने श्रीराम की कथा पूछी थी लेकिन याज्ञवल्क्य जी श्री राम कथा न कहते हुए शिव कथा सुना दिएl भारद्वाज जी अत्यंत श्रद्धा भक्ति से कथा श्रवण कियाl यज्ञवल्क जी ने भारद्वाज जी से पूछा कहो कथा कैसी लगी ऋषि ने कहा प्रभु मैं कृति कृति हो गया lउनकी श्रद्धा भक्ति से प्रसन्न होकर रिसी ने कहा है- he muni विश्वनाथ के श्री चरणों में जिसकी priti होती है वही श्री राम का सच्चा भक्त हैl मानस ने शिव भक्तों एवं श्री राम के भक्तों का जो दिव्य दर्शन प्रस्तुत किया है वह अन्यत्र दुर्लभ है lश्री राम चरित्र के पूर्व श्री शिवचरित्र के आख्यान का वस्तुतः क्या औचित्य है यही रहस्य समाज को बताने हेतु विस्तार रहित शिवचरित्र का आख्यान किया गया हैl यदि मनुष्य शिव रहस्य को समझ जाए तो एक दिव्य भक्ति का संचार समाज में हो जाता हैl संपूर्ण मानव समाज में सद्भावना की महती स्थापना हो जाती है lसत्यम शिवम सुंदरम से देश परिपूर्ण हो सकता हैl आज प्रत्येक परिवार विभक्त हो गया है घर से लेकर गांव तक गांव से जवार तक जवार से प्रखंड तक प्रखंड से जिला तक जिला से राज्य तक तथा राज्य से देश और देश से विदेश तक पृथक हो रहे हैं lआज समाज हम दो हमारे दो कि कुछ सेट विचारधारा में तेजी से प्रवाहman होकर विनाश एवं अशांति के ग्रंथ में शीघ्रता पूर्वक गिरता जा रहा है lशिव परिवार इससे अलग दर्शन में जीता हैl वह है वसुदेव कुटुंबकमl शिव परिवार के प्रत्येक सदस्यों में वह मनुष्य है फिर भी यह परिवार संपूर्ण शांति एवं सुख पूर्वक एक ही साथ रहता हैl शिव जी के पांच मुख 10 हाथ कार्तिकेय जी को छह मुख, गणेश जी का मुख हाथी का, पार्वती जी को एक मुख्य तीन नेत्र इन चार सदस्यों के रूप रंग स्वभाव खान-पान सब कुछ में एकता का सर्वथा अभाव है lशिवजी का वाहन बैल पार्वती जी का वाहन सिंह गणेश जी का चूहा, कार्तिकेय जी का मोर ,शिव जी के गले में सर्प यह सभी जन्मजात एक दूसरे के घोर शत्रु है इन सभी के खान-पान एवं रहन-सहन प्रकृति आदि में जमीन आसमान का फर्क है फिर भी आज तक शिव परिवार में कोई विभाजन नहीं हुआ ठीक इसके विपरीत आज मानव समाज में सभी के घर में रामचरित कथा है सभी पाठ पूजा करते हैं किंतु अन्य बात तो छोड़ो अब तो बाप बेटा भी अलग-अलग रहने लगे हैं अरे कहां तक कहा जाए पति-पत्नी भी अब फैमिली कोर्ट में अपनी-अपनी पैरवी करने में प्रतिष्ठा समझने लगे हैंl मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा के पूर्व श्री शिव पार्वती की कथा आने का मुख्य कारण यही है कि जो लोग भगवान शिव की वंश परंपरा का अनुपालन प्रत्येक मानव के लिए अत्यावश्यक है जो शिव की तरह विषपान करके समाज को जोड़कर जीवन पर्यंत सुबह से शाम- शाम से सुबह तक वसुदेव कुटुंबकम ,प्राणियों में सद्भावना और विश्व का कल्याण हो तो वही सच्चा राम भक्त हैl शिव भक्ति से श्री राम भक्ति का परिचय प्राप्त होती है जो शिव को प्रिय नहीं और शिवजी जिसको प्रिय नहीं वह राम को भी प्रिय नहीं हो सकता”l

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