
बक्सर। देश के हर हिस्से में अपनी एक अलग मान्यता और परंपरा का पालन होता है। बक्सर में हर साल आयोजित होने वाला पंचकोशी परिक्रमा मेला अपने आप में अनूठा मेला है, जहां पांच दिनों में पांच कोस की दूरी तय कर पांच अलग स्थानों पर पड़ाव डाले जाते हैं। मेले में हर जगह अलग-अलग प्रकार के भोजन ग्रहण करने की परंपरा का पालन किया जाता है। इस मेले के आखिरी दिन अंतिम पड़ाव पर बक्सर के चरित्रवन में आयोजित होती है, जिसमें अनेक राज्यों के लाखों लोग शिरकत करते हैं और बिहार के प्रसिद्ध लिट्टी चोखा का आनंद उठाते हैं।
पंचकोशी यात्रा मेला अपने आप में परंपराओं को लेकर ही बेहद अनूठा है। मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक स्थान पर रात्रि विश्राम कर अलग प्रकार के पांच व्यंजन ग्रहण करने की परंपरा है। कहते हैं कि बक्सर में विश्वामित्र ऋषि के आग्रह पर आए श्रीराम जब ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों का संहार कर लिए तब किन्हीं कारणों से जिन ऋषियों से नही मिल पाए थे। बाद में आकर उनसे मिलने के लिए पांच दिनों की यात्रा कर पांच ऋषियों के आश्रम में गए थे। वहां रात्रि विश्राम कर उन्होंने सबका आशिर्वाद ग्रहण किया था। तब ऋषियों द्वारा श्रीराम के स्वागत में जिन भोज्य पदार्थों को खिलाया गया था उसी का अनुसरण करते आज भी पांचों स्थानों पर प्रसाद।
का वितरण होता है। मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से आयोजित होने वाला यह मेला
बुधवार से प्रारंभ हो रहा है। इस पुरातन संस्कृति को जीवित रखने के उद्देश्य से पंचकोशी यात्रा समिति का गठन भी किया गया है जो हर साल आयोजित होने वाले इस मेले की व्यवस्था और देखरेख करती है. पंचकोसी परिक्रमा के सचिव डॉ राम नाथ ओझा ने बताया कि इस परिक्रमा का बहुत बड़ा महत्व है सनातन धर्म में आखिरी दिन बक्सर के चरित्रवन में लिट्टी चोखा खाकर समापन हुआ
स्वामी श्री श्री1008 श्री रामानुजाचार्य स्वामी राजगोपालाचार्य जी
संत महात्मा अच्युत प्रपन्नाचार्य महाराज महंत राजा राम चरण अनुराग दास जी महाराज भोला बाबा दामोदरा आचार्य जी
महाराज”त्यागी स्वामी जी”
महाराज मंच संचालक डॉ राम नाथ ओझा।