Thu. Apr 23rd, 2026

जिस राजा के राज्य में गाय दुखी हो,संत दुखी हो,ब्राम्हण दुखी हो, उस राजा की कीर्ति,आयु,तेज,नष्ट हो जाता है।
तस्य मतस्य नश्यंती कीर्तिरायुर्रभगो गति।। जब प्रीक्षित ने धर्म रूपी बैल को देखा तुम्हारे तीन चरण किसने काटे,क्योंकि धर्म के 39 लक्षण है, उनमें से चार बचे सत्य, तप, दया,दान, कलयुग में सिर्फ एक बचा दान, दान से ही जीव का कल्याण होगा,राजा के राज्य में ब्राम्हण धर्म का आचरण नही करता हो तो पहले उसे समझावे , न माने तो उसका धन छीन कर तपस्वी ब्राम्हण को बाट दे,फिर भी धर्म आचरण न करे तो उसे बेगारी में लगा दे, तब उसे लगेगा की संध्या पूजा करे तो राजा भी सरण में आयेगा।
युग निर्माता ब्राम्हण है, ब्राम्हण जब तप में योग में पूर्ण प्रतिष्ठित होता है तो सतयुग आ जाता है।ब्राम्हण जब कर्मकाण्ड में यज्ञादिक में प्रतिष्ठित होता है तो त्रेता आ जाता है। ब्राम्हण जब तांत्रिक वैदिक पद्धति से पूजा में लग जाता है तो द्वापर आ जाता है।और ब्राम्हण न त्याग,तपस्या,योग ध्यान ,समाधि , यज्ञ,पूजा पाठ को तिलांजलि दे देता है तो कलयुग आ जाता है। राजा के बातो को धर्म ने सुना तो उसने कहा आपने जो कहा वो आपके खानदान के अनुरूप है।धर्म ने कहा भगवत अतिरिक्त दृष्टि यही दुख का कारण है।ज्ञानी लोग ऐसा मानते है।योगी लोग अपने आत्मा को दुख का कारण मानते है। दैवम अन्ये। ज्योत्सी लोग दैव को दुख का कारण मानते है।
पूर्व मिमांसक दुख का कारण कर्म को मानते है। कोई न काऊ सुख दुख करी दाता, निज कृत कर्म भोग सुनी भ्राता।
भक्त भगवान की इक्षा को ही दुख का कारण मानता है। कलयुग को मारा नही परीक्षित ने क्यों कलयुग में दुर्गुण बहुत है लेकिन गुड भी है।
कलि कर एक पुनीत प्रतापा, मानस पुण्य होही नही पापा।।

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