Fri. Apr 17th, 2026

जलवायु परिवर्तन की मार पर प्राकृतिक खेती लगायेगा मरहम-जिला कृषि पदाधिकारी
संयुक्त कृषि भवन के परिसर में प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन
बक्सर: सदर प्रखंड स्थित संयुक्त कृषि भवन के प्रांगण में दिन शनिवार को नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तत्वाधान में प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण की आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन डाॅ. जगत सिंह, उप निदेशक, राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती,भारत सरकार, स्मृति सिंह, एग्री बिजनेश एक्सपर्ट, नमामी गंगे, जल शक्ति मंत्रालय,भारत सरकार, डाॅ. विनय, वैज्ञानिक अधिकारी, श्री मनोज कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी तथा प्रगतिशील कृषक द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया वहीं मंच संचालन अमान अहमद ने की। किसानों को संबोधित करते हुए डाॅ जगत सिंह ने कहा कि प्राकृतिक खेती का मुख्य आधार देशी गाय है। प्राकृतिक खेती में गोबर का खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष और प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे राॅक फाॅस्फेट, जिप्सम आदि द्वारा पौधों को पोषण तत्व दिये जाते हैं। प्राकृतिक खेती में प्रकृति में उपलब्ध जीवाणुओं, मित्र कीट तथा जैविक कीटनाशक द्वारा फसल को हानिकारण जीवाणुओं से बचाया जाता है। आगे उन्होंने बताया कि रासायनिक खेती से मृदा के स्वरुप में काफी बदलाव हुआ है, जो भविष्य की खेती के लिए खतरे की घंटी है साथ ही प्रकृति में तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में काफी गिरावट आई है। इससे निजात हेतु प्राकृतिक खेती मिल का पत्थर साबित होगा। स्मृति सिंह ने प्राकृतिक खेती द्वारा उत्पादित उत्पाद को बाजार उपलब्ध कराने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों को बाजार के लिए कृषक उत्पादक संगठन से जोड़ कर विस्तृत बाजार मुहैया कराया जायेगा। डाॅ विनय द्वारा प्राकृतिक खेती के महत्व पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में लागत कम तथा मुनाफा अधिक है, जिससे प्राकृतिक खेती काफी लाभप्रद है। जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने किसानों के बीच प्राकृतिक खेती को वर्तमान समय के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज के कारण बक्सर जिला सर्वाधिक सेंसिटिव माना गया है। इस परिस्थिति में प्राकृतिक खेती जलवायु परिवर्तन के लिए मरहम का कार्य करेगा। मौके पर आत्मा की उप परियोजना निदेशक बेबी कुमारी, सहायक निदेशक,प्रक्षेत्र शेखर किशोर, आत्माकर्मी रघुकुल तिलक, विकास कुमार राय, चंदन कुमार सिंह समेत कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार व प्रगतिशील कृषक मौजूद थे।

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