श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में चौदहवें दिन वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के सफल निर्देशन में शुक्रवार को देर रात्रि मंचित रामलीला के दौरान “सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध” प्रसंग का मंचन किया. जिसमें दिखाया गया कि भगवान श्री राम व लक्ष्मण सबरी को सद्गति देने के पश्चात आगे बढ़ते हैं, जहां उनसे हनुमान जी से भेंट होती है. हनुमान जी श्री राम व लक्ष्मण को सुग्रीव के पास ले जाते हैं, और वहाँ ले जाकर उनसे मित्रता करवाते हैं. दोनों एक दूसरे की सहायता करने का वचन देते हैं. वहाँ श्री राम अपने मित्र सुग्रीव को दिए गए वचन के अनुसार उसके भाई बाली का वध कर देते हैं, और सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य मिल जाता है. राज्य मिलने के पश्चात सुग्रीव श्रीराम की शुद्ध लेना भूल जाते हैं. तो लक्ष्मण जी किष्किंधा जाकर सुग्रीव पर क्रोध करते हैं. तब जाकर सुग्रीव माता सीता का पता लगाने के लिए बंदरों को भेजते हैं. इधर हनुमान, जामवंत, नल-नील, अंगद, माता सीता की खोज में जुट जाते हैं. सीता का पता लगाते हुए सभी बंदर समुद्र के करीब पहुंच जाते हैं. सभी वीर समुद्र पार करने में असमर्थता जाहिर करते हैं. तब जामवंत जी हनुमान जी को उनके बल का स्मरण कराते हैं. इसके पश्चात हनुमान जी गर्जना करते हुए समुद्र मार्ग में चल पढ़ते हैं. मार्ग में सांपों की माता सुरसा हनुमान जी को खाने के लिए सौ योजन का मुंह फैलाती है, परंतु हनुमान जी चतुराई से छोटा रूप बनाकर उनके मुख से बाहर आ जाते हैं. आगे बढ़ने पर सिंहका नाम की राक्षसी मिलती है उसको मार कर हनुमान जी लंका के द्वार पर पहुंच जाते हैं, जहां लंकिनी उनका मार्ग रोकती है.
उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है. लीला के दौरान पुरा परिसर दर्शकों से खचाखच भरा रहता है.