
आत्मा,बक्सर द्वारा मधुमक्खीपालन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्नबक्सर: संयुक्त कृषि भवन,बक्सर के सभागार में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण(आत्मा) की ओर से संचालित तीन दिवसीय प्रशिक्षण का समापन दिन बुधवार को किया गया. प्रशिक्षण में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक श्री मनोज कुमार ने सभी प्रशिक्षणनार्थियो से मधुमक्खी पालन से सम्बंधित फीडबैक लिया. उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र शहद उत्पादन करने वाले विश्व के पांच सबसे बड़े शहद उत्पादन करने वाले देशो में शामिल है.किसान की आय बढ़ाने में मधुमक्खी पालन का अहम् योगदान है. इस दिशा में छोटे,सीमांत, महिला सशक्तिकरण एवं भूमिहीन कृषक के लिए मधुमक्खी पालन वरदान साबित हो रहा है. इसको प्रारंभ करने के लिए कम पूंजी एवं कम जमीन की जरुरत होती है. मधुमक्खी उत्पाद जैसे मधु, रायलजेली व पराग के सेवन से मानव स्वस्थ एवं निरोगित होता है। मधु का नियमित सेवन करने से तपेदिक, अस्थमा, कब्जियत, खूल की कमी, रक्तचाप की बीमारी नहीं होती है। रायल जेली का सेवन करने से ट्यूमर नहीं होता है और स्मरण शक्ति व आयु में वृद्वि होती है। मधु मिश्रित पराग का सेवन करने से प्रास्ट्रेटाइटिस की बीमारी नहीं होती है। मौनी विष से गाठिया, बताश व कैंसर की दवायें बनायी जाती हैं. इस प्रकार मधु अनेक दृष्टिकोण से फायदेमंद है. कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ श्री रामकेवल ने मधुमक्खी पालन के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि किसान मधुमक्खी पालन की आधुनिक विधि से व्यवसाय शुरू करें तो इसके लिए किसान को लकड़ी के बने बॉक्स, मुह रक्षक टोपी(जाली ), रानी मक्खी, हाथों के दस्ताने, आवश्यकतानुसार खुली भूमि, शहद एकत्रित मशीन, आदि उपकरण/ साधन की जरूरत पड़ती है | मधुमक्खी की प्रजाति इटालियन मेलीफेरा को अंधेरे बक्सों में रखा जाता है और यह बक्से प्रशिक्षण देने वाली कंपनियां या उधान विभाग/ कृषि विभाग से ले सकते हैं | एक मधुमक्खी पालन बॉक्स की कीमत लगभग चार हजार रूपये होती है जिसमें स्टैंड, अंदर की जालियां आदि के साथ पूरा सेट होता है | शहद तैयार होने के बाद किसान शहद निष्कासन वाली मशीन में इन छत्तों से शहद निकाल सकते हैं जो आसान सी प्रक्रिया है | शहद इकट्ठा करने के लिए मधुमक्खी परिवार में तीन प्रकार की मधुमक्खियां पाई जाती है, जिसमे रानी मधुमक्खी, नर मधुमक्खी,वर्कर मधुमक्खी श्रमिक शामिल है. पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी मधुमक्खी पालन महत्वपूर्ण है. अगर पैदावार की बात करे तो मधुमक्खी फूलों में से शहद निकालने पर फसल में किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता है जबकि फसल को कई गुना लाभ होता है .अर्थात मधुमक्खी पालन जैविक खेती का भरपूर रूप है | प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रभारी उप परियोजना निदेशक विकास कुमार राय,आत्माकर्मी चन्दन कुमार सिंह, सत्येन्द्र राम,त्रिपुरारी सिन्हा सहित प्रगतिशील कृषक संजू देवी,पूनम देवी, मीना देवी, शांति देवी सहित अनेक कृषक मौजूद थे.