
बक्सर: किसानों को वैज्ञानिकों का साथ मिले तो हरित क्रांति का सपना खेतों में अवश्य दिखेगा। इस मद्येनजर जिले की आत्मा संस्थान द्वारा संयुक्त कृषि भवन,बक्सर के सभागार में दिन मंगलवार को दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्Ÿाालाप कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार एवं जिला अग्रणी प्रबंधक द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री संदीप शर्मा ने बताया कि बैंक द्वारा कृषि व कृषि से सम्बद्ध क्षेत्र में किसानों के विकास हेतु बैंक द्वारा पाॅंच लाख से उपर का भी ऋण मुहैया कराया जा रहा है। इस दिशा में सहयोग हेतु मेरे मोबाईल नंबर 6204066911 पर संपर्क कर सकते हैं। जिला कृषि पदाधिकारी-सह-आत्मा के परियोजना निदेशक श्री मनोज कुमार ने बताया कि इसका उदेश्य किसानों को मौसमी फसलों का बुवाई से कटाई तक प्रबंधन करना है। इसमें आत्मा के मार्गदर्शिका के अनुसार प्रत्येक वर्ष वार्तालाप आयोजित किया जाता है, जिसमें मौसमी फसलों के अनुसार फसल प्रबंधन पर चर्चा की जाती है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खरीफ मौसम सम्बंधित समस्याओं से वैज्ञानिकों को अवगत कराया। उन्होंने किसानों को कृषक हितार्थ समूह से जुड़ने की सलाह दी ताकि संगठनात्मक तरिके से मानवबल का उपयोग कर सामूहिक खेती को बढ़ावा मिल सके। इससे फसल के आर्थिक लागत में कमी के साथ बाजार आसानी से उपलब्ध हो जाता है। उन्होंने खरीफ फसल में उगायी जाने वाली सब्जियों के प्रबंधन पर प्रकाश डाला। कृषि विज्ञान केन्द्र,बक्सर के मृदा विशेषज्ञ डाॅ. देवकरण ने बताया कि फसलों का ससमय प्रबंधन न होने से उत्पादन प्रभावित होता है। इस हेतु समयानुसार फसल प्रबंधन बेहद जरुरी है। उन्होंने सत्रह पोषक तत्वों के महत्व पर चर्चा की, जिसमें अधिकतर कृषक चार पोषक तत्वों नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस, पोटाश तथा जिंक के व्यवहार से अवगत हैं, शेष पोषक तत्वों के महत्व को जानने की आवश्यक्ता है ताकि उसकी ससमय भरपाई की जा सके। उन्होंने फसलों में रोग की पहचान कर कृषि वैज्ञानिक या प्रशिक्षित डीलर के सलाह से अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक दवा प्रयोग करने की सलाह दी। केेभीके के पादप सुरक्षा विशेषज्ञ रामकेवल ने किसानों के प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि धान की खेती में खरपतवार प्रबंधन हेतु प्रेटीलाक्लोर का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करें। आगे उन्होंने बताया कि फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्व अत्यधिक पैदावार के कारक हैं। धान की फसलों में खैरा रोग से ग्रसित होने पर जिंक का प्रयोग फायदेमंद है वही आवश्यक्तानुसार मृदा जाॅंच कराकर सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति करना जरुरी होता है ताकि पैदावार में आशातीत बढ़ोतरी हो। कार्यक्रम का समन्वय आत्मा संस्थान के रघुकुल तिलक, बालाजी तथा चंदन कुमार सिंह द्वारा किया गया। वार्तालाप में अनुमंडल कृषि पदाधिकारी,बक्सर एवं डुमराॅंव, सहायक निदेशक,प्रक्षेत्र, सहायक निदेशक,रसायन श्रीमती वसुंधरा, सहायक निदेशक, भूमि संरक्षण कुमारी संजू लता,उप परियोजना निदेशक बेबी कुमारी, प्रभारी उप परियोजना निदेशक विकास कुमार राय,प्रखंड तकनिकी प्रबंधक अजय कुमार सिंह,आत्माकर्मी त्रिपुरारीशरण सिन्हा, दीपक कुमार, सत्येन्द्र राम प्रगतिशील कृषक हरेराम पाण्डेय, चितरंजन तिवारी, सर्वजीत मिश्रा, दिनेश कुमार ओझा, विमलेन्दु ओझा, विकास ओझा सहित सभी प्रखंडों के कृषक उपस्थित थे। वार्तालाप का आयोजन दिनांक 03 अगस्त को भी आयोजित रहेगा।