
आज दिनांक 26 जून 2022 को बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार नशा मुक्ति दिवस पर व्यवहार न्यायालय, बक्सर स्थित कार्यालय जिला प्राधिकार, विधिक सेवा सदन, बक्सर एवं शांति नगर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मौके पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- सचिव, श्री धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने उपस्थित पैनल अधिवक्ताओं, पारा विधिक स्वयंसेवकों एवं कार्यालय कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज इस समय के दौर में स्वम नशा ना कर, दूसरे को नशा ना करने की प्रेरणा देना है। खुद नशा न कर आप सबसे बड़ा उदाहरण अपने समाज एवं अपने परिवार के बीच प्रस्तुत कर सकते हैं। आज के दौर में युवा, अल्पविकसित बचचे, बूढ़े अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें काफी तनाव में रहना पड़ता है। इसी तनाव को दूर करने के लिए वह नशा के तरफ अपने कदम बढ़ा देते है। इस दिन को हमलोग हर साल 26 जून को विश्व स्तर पर “नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस” या “विश्व ड्रग दिवस” के रूप में मनाते है। यह दिन दुनिया को नशीली दवाओं से मुक्त करने के लिए किए जा रहे कार्यों और सहयोग के विभिन्न प्रयासों का प्रतीक है। आपको बता दें कि विश्व ड्रग दिवस की शुरुआत 26 जून 1989 को हुई। जबकि नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उत्सव को 7 दिसंबर, 1987 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव 42/112 के तहत पारित किया गया था। वर्तमान स्थिति में नशीली दवाओं के दुरुपयोग और विश्व स्तर पर इस बुराई से लड़ने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं। इस पर विचार विमर्श करने कि जरुरत है। वर्ष 2022 का विषय है: “स्वास्थ्य और मानवीय संकटों में मादक द्रव्य चुनौतियों का समाधान” (“Addressing drug challenges in health and humanitarian crises”)ये विषय दुनिया की वर्तमान स्थिति की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए तय किया गया है। जो मानव के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही विनाशकारी है। चाहे वह कोविड 19 जैसी महामारी की बात हो या रूस-यूक्रेन के युद्ध की।संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा ड्रग एंड क्राइम पर 2021 में एक रिपोर्ट जारी की गई थी। जिसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए गए थे। ये रिपोर्ट मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित थी कि कैसे महामारी ने युवाओं में ड्रग्स की तस्करी के अप्रत्याशित खतरों को बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक के रूप में काम किया है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार पिछले साल दुनिया भर में लगभग 275 मिलियन लोगों ने नशीली दवाओं का इस्तेमाल किया, जिनमें से 36 मिलियन से अधिक लोग नशीली दवाओं के उपयोग से पीड़ित थे। हालांकि, रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि पिछले 24 वर्षों में दुनिया भर में कैनबिस की शक्ति चार गुना तक बढ़ गई है जो कि खतरे का संकेत है।• पहले भांग या मारिजुआना की उत्पत्ति मध्य और दक्षिण एशिया हुआ करती थी।• नशीले पदार्थों के उपयोग के कारण होने वाली बीमारी के सबसे बड़े बोझ के लिए ओपियोइड्स का खाता जारी है।• 2010 से 2019 के बीच नशीली दवाओं का उपयोग करने वालों की संख्या में 22% की वृद्धि हुई है।• भांग में प्रमुख रूप से 9-THC पाया जाता है जो कि लंबे समय में मानसिक स्वास्थ्य विकारों के विकास के लिए जिम्मेदार होता है,• एशिया में, चीन और भारत मुख्य रूप से 2011-2020 के दौरान विश्लेषण किए गए 19 प्रमुख डार्कनेट बाजारों में बेची जाने वाली दवाओं के शिपमेंट से जुड़े हुए हैं।• इंटरनेट और ऑनलाइन बिक्री ने दवाओं के बाजार को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। डार्क वेब पर ड्रग्स का बाजार सालाना 315 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।• महामारी के कारण दुनिया भर में 100 मिलियन से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी में गिर गए हैं और 2020 में लगभग 255 मिलियन नौकरियां चली गई हैं।1946 में आर्थिक और सामाजिक परिषद के प्रस्ताव 9(1) द्वारा मादक औषधियों पर आयोग की स्थापना करके नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ पहली कार्रवाई की गई थी। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय दवा नियंत्रण संधियों के आवेदन की निगरानी करना था। फिर 1987 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 26 जून को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में चिह्नित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। UNODC की स्थापना 1997 में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय ड्रग कंट्रोल प्रोग्राम (UNDCP) और वियना में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अपराध निवारण और आपराधिक न्याय प्रभाग को मिलाकर ड्रग नियंत्रण और अपराध रोकथाम के कार्यालय के रूप में कार्य करने के लिए की गई थी। नशा मुक्त भारत अभियान या ड्रग्स-मुक्त भारत अभियान देश के 272 जिलों में 15 अगस्त 2020 (स्वतंत्रता दिवस) पर शुरू किया गया था, जो नशीली दवाओं के दुरुपयोग से सबसे अधिक असुरक्षित और प्रभावित पाए गए थे। इसका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों के साथ सकारात्मक भागीदारी, जन शिक्षा और स्वच्छता के लिए सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों और टीआरसी यानी उपचार, पुनर्वास और परामर्श सुविधाओं के एकीकरण के द्वारा भारत को एक दवा मुक्त देश बनाना है। इन्ही सब बातों पर माननीय न्यायाधीश द्वारा प्रकाश डाला गया।मौके पर पैनल अधिवक्ता आनंद रंजना, कुमारी अरुणिमा, नीलम, चंद्रकला वर्मा, रवि प्रकाश, तेज प्रताप सिंह, विद्यासागर तिवारी आदि पारा विधिक स्वयंसेवक अविनाश, विवेक, दीपक, विकेश सिंह, गजेंद्र नाथ दुबे, मधुश्री, रुकैया, अंशु देवी आदि, कार्यालय कर्मी दीपेश, संजीव, सुमित, सुनील, मनोज आदि मौजूद रहे।