श्री राम लीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के क्रम में सोलहवें दिन वृंदावन से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला मंडल के स्वामी श्री करतार बृजवासी के सफल निर्देशन में रविवार को दिन में मंचित श्री कृष्णलीला के दौरान
“अक्रुर आगमन” चरित्र का मंचन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि भगवान कृष्ण ब्रज में 11 वर्षों तक रहने के पश्चात अनेक प्रकार की लीलाएं करते हैं. तब देवताओं ने नारद जी को गोकुल में श्री कृष्ण के पास भेजा और देवताओं को दिया गया वचन याद करवाया कि आपका अवतार दुष्टों का संहार करने व भक्तों को सुख प्रदान करने के लिए हुआ है. अब मथुरा में कंस का अत्याचार असहनीय हो चला है. इस दुष्ट के विनाश का समय आ चुका है. तब श्री कृष्ण ने नारद जी को कंस के पास मथुरा भेज कर वहां धनुष यज्ञ के मेले का तैयारी करवाते हैं. दोनों भाई कृष्ण व बलराम को कंस मथुरा धनुष यज्ञ में बुलावा भेजता है, इसकी सूचना अक्रूर जी जो नंद बाबा के संबंध के भाई थे वह मथुरा से रथ लेकर गोकुल आते हैं जहाँ रास्ते में ग्वाल बाल के साथ कृष्ण गैया चराते मिल जाते हैं. अक्रूर जी उन्हें धनुष यज्ञ व मेले की जानकारी देते हुए कंस द्वारा दोनों भाइयों को मेला में मथुरा आने की बात कही जाती है. यह बात सुनकर श्री कृष्णा तुरंत तैयार हो जाते हैं और घर पहुंच कर श्री कृष्ण यह बात नंद बाबा और यशोदा मैया को भी बताते हैं. वहाँ सभी उन्हें मथुरा जाने से मना करते हैं. परंतु कृष्ण सारे ब्रजमंडल को उदास करते हुए मथुरा चल पड़ते हैं.
उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है. लीला के दौरान पुरा परिसर दर्शकों से खचाखच भरा रहता है.