सर्वजन कल्याण सेवा समिति सिद्धाश्रम धाम बक्सर द्वारा आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ सह नवदिवसीय श्री राम कथा का चतुर्थ दिन प्रवचन –
“अखिल लोक का एक ही नायक है जिनका नाम है ब्रह्मl यही ब्रह्म जब सृष्टि करने लगता है तो ब्रह्म, पालन करने लगता है तो विष्णु करने लगता है तो शंकर के नाम से जाना जाता हैl सृष्टि काल में सांसारिक विभिन्न स्थितियों को नियंत्रित संयंत्रित करने के लिए जब धरा पर अवतरित होता है तब हम उस नारायण को अलग-अलग राम,कृष्ण, वामन आदि आदि नाम से जानते हैं lयही अवतार समय-समय पर होता हैl ईश्वर अपनी इच्छा अनुसार अवतार लेकर संसार के कल्याणार्थ लीला करता है यही क्रिया समाज को नाम रूप लीला एवं धाम विचार तत्व प्रदान करती हैl यह चार मार्ग हैं, ईश्वर ब्रह्म को प्राप्त करने के साधन भी हैंl इन चारों में से एक का भी सेवन करने पर मानव जीवन प्रताड़ित हो जाता है जो चारों का सेवन करते हैं उनका कहना ही क्या हैl शास्त्रों के अनुसार उसे ब्रह्मांड नायक ब्रह्म के अवतार का कारण जब-जब धर्म की हानि होती है धर्म का उत्थान होता है तब तब वह ब्रह्म विविध रूप धारण करता हैl साधुओं की रक्षा, राक्षसों का विनाश एवं धर्म की स्थापना का कार्य करता है किंतु वह ईश्वर जब नर रूप में अवतरित होता है तो संपूर्ण समाज को शिक्षा भी विशेष रूप से प्रदान करता है lवह संपूर्ण मानव जाति को मानवता का गुण सीखना है जिसका मध्य होता है आचरण lआचरण द्वारा मानवीय मूल्यों के प्रशिक्षण सुनिश्चित करने हेतु रामावतार प्रमुख हैl ईश्वर को प्राप्त करने के मुख्य दो ही विधाएं हैं प्रथम स्वयं चलकर उसके पास पहुंच जाए यह ज्ञान मार्ग है और दूसरा उस ईश्वर को बुलाकर अपने पास लाया जाए य़ह भक्ति मार्ग हैl अवतार भक्ति मार्ग में संभव हैl भक्त जब संसार में aधर्म को बढ़ते देखकर तथा धर्म की गिलानी देख सुनकर बालकों की तरह रुदन करके आहें भरने लगता है तब अपने प्रिय बालक भक्तों की रक्षा हेतु वह ब्रह्म बैकुंठ से यात्रा करके मृत्यु लोक में उतरता हैl इसी उतरने की क्रिया का नाम है अवतार lअवतार की अवतार अर्थात अवतार लेकर रावण कंस, दुर्योधन आदि चाहे जो भी और धर्म परायण हो सभी का नाशक तथा विभीषण सुग्रीव ग्वाल बाल एवं पांडव आदि dharmik लोगों का प्रकाशक होता है l ब्रह्म, वेद, देव नर ,नारी इत्यादि की रक्षा सनातन धर्म की समस्त संसार में स्थापना तथा विभिन्न विधाओं के द्वारा मानव जीवन जीने की कला उन्नत आश्रम द्वारा मानव आचार व्यवहार द्वारा संबंध निर्वहन तथा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष पुरुषार्थ चतुष्ट प्राप्त का मार्ग प्रशस्त करके स्वलोक गमन कर जाता हैl समय अनुसार युग युग में ईश्वर का अवतार नहीं हो तो सारी सृष्टि अर्थव्यवस्था असंतुष्ट हो जाएगी, चारों तरफ भोग विलास तथा नाना प्रकार की पशुता एवं दानवता की स्थापना होकर सनातन धर्म रसातल में चला जाएगाl चारों तरफ राक्षस राज होकर वातावरण ऐसा होगा जिसकी लाठी उसकी भैंस की स्थिति हो जाएगीl अतः ईश्वर का अवतार सनातन धर्म की स्थापना एवं मानवता निर्माण में सिद्ध रामबाण है lभक्तों की करुणा पुकार से अवतार होता है नारायण का धरा पर lअवतार से संसार को नाम ,रूप, लीला और धर्म यह चार तत्व मिलते हैंl