
वर्तमान समय में किसानों के बीच रासायनिक उर्वरकों के अधाधुंध प्रयोग का ट्रेंड चरम सीमा पर हैं। किसानों में धारणा है कि किसी भी फसल में यूरिया एवं डीएपी के प्रयोग से अधिक पैदवार हासिल की जा सकती है। लेकिन सच तो यह है कि असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मृदा का स्वास्थ्य खतरे में है। मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा दीर्घकालीन खेती के लिए आवश्यक है। उक्त बाते जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने मौके पर कही। उन्होंने संयुक्त कृषि भवन के परिसर से दिन मंगलवार को चलंत मिट्टी जॉंच प्रयोगशाला वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि उक्त वाहन जिले के सुदूर ग्रामों में भ्रमण कर मिट्टी जॉंच कराने से होने वाले फायदे को किसानों के बीच जागरुक करेगा साथ लाईव डेमो के माध्यम से मिट्टी जॉंच के फायदे से अवगत करायेगा। मिट्टी जॉंच के दौरान बारह पैरामीटर में मिट्टी परीक्षण किया जायेगा जिसमें पीएच, ईसी, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जींक, बोरान, आयरन, मैग्निशियम तथा कॉपर प्रमुख है। आगे उन्होंने बताया कि हर खेत को स्वस्थ खेत बनाना है। इसके लिए सभी किसानों को मिट्टी जॉंच कराना होगा। इस बीच इच्छुक कृषक सम्बंधित पंचायत के किसान सलाहकार या कृषि समन्वयक से संपर्क कर निःशुल्क मिट्टी करा सकते हैं। विभाग द्वारा मिट्टी जॉंच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जायेगा जिसकी वैद्यता तीन वर्षो तक रहेगी। किसान मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुशंसा के आधार पर आगामी फसलों में उर्वरक का प्रयोग कर सकते हैं। सहायक निदेशक,रसायन श्रीमती वसंुधरा ने बताया कि किसान मिट्टी जॉंच कराकर विभाग से मृदा स्वास्थ्य कार्ड अवश्य प्राप्त करें,ताकि कृषक मृदा स्वास्थ कार्ड के अनुसार अपने खेतों में संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल कर आर्थिक एवं मृदा नुकसान को कम कर सकें। मिट्टी जॉंच उपरांत मृदा स्वास्थ कार्ड इपींतेवपसीमंसजीण्पद वेबसाईट से ऑनलाईन डाउनलोड कर सकते हैं। मौके पर सहायक निदेशक,पौधा संरक्षण गिरिराज कुमार, एआरओ मनोज कुमार, लैब प्रभारी अमरेश कुमार राय, आत्माकर्मी चंदन कुमार सिंह एवं अन्य कर्मी उपस्थित थे।