

पैनइंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता अभियानआज भी जिले में जारी रहा। आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर बिहार राज्य के सभी जिलों में चलाया जा रहा है।इसी क्रम में बक्सर जिले के पारा विधिक स्वम सेवक जनार्दन सेठ, विवेक कुमार द्वारा इटाढ़ी प्रखंड के भीलवाड़ा पंचायत में, आश लाल कुमार द्वारा भोजपुर कदीम, पुराना भोजपुर, के बिन टोली, आंगनबाड़ी केंद्रों पर, विकेश कुमार द्वारा ब्रह्मपुर प्रखंड के देवकुली पंचायत, शिव गांव, में , अनीशा भारती द्वारा डुमराव प्रखंड के पंचायत खरहांटांर, छतनवार, योगीया, हरिजन टोली में, कमला शंकर तिवारी द्वारा सिमरी प्रखंड के बलिया पंचायत, फुलमनी का डेरा, बड़कागांव, सलीमपुर, गजेंद्र दुबे द्वारा जगदीशपुर पंचायत के भटवालिया, प्रेम प्रकाश द्वारा डुमरी बस्ती, बांग्ला टोला में, राधेश्याम तिवारी द्वारा सहियार पंचायत के चौधरी टोला में, शिवजी पांडे द्वारा ग्राम सभा के ग्राम, मठिया, बनकट, सत्यम पांडे और सरोज चौबे द्वारा राजपुर प्रखंड के करौली, खीरी, खटका, निर्मलपुर, सोनी गांव ,रामनगर में, सोनू कुमार द्वारा केसठ पंचायत के पोखरा टोला गांव में, राजेश कुमार द्वारा नावानगर प्रखंड के चित्र टोली, विवेक कुमार गुप्ता द्वारा इटाढ़ी प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर आज लोक अदालत के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने सभी ग्रामीणों को बताया कि लोक अदालत के माध्यम से आप जिला न्यायालयों में लंबित वादों के अलावा निम्न तरीकों से भी आप अपने वादों का निष्पादन करा सकते हैं । इससे आपको निम्न फायदा होता है।
- मध्यस्थता
- सुलह
- न्यायिक समझौता / लोक अदालत
इन तीनों तरह से आपके द्वारा वादों के निष्पाद में लाभ है ।
- वकील का खर्च नहीं होता।
- कोई कोर्ट फीस नहीं लगती ।
- पुराने मुकदमे की कोर्ट फीस दोनों पक्ष को वापस मिल जाती है।
- किसी पक्ष को सजा नहीं होती मामले को बात-चीत द्वारा सुलह समझौता से हल कर लिया जाता है।
- मुआवजा और हर्जाना तुरंत मिल जाता है।
- मामले का निपटारा तुरंत मिल जाता है ।
- सभी को आसानी से न्याय मिल जाता है और लोक अदालत के फैसले का पूर्ण रूप से कानूनी महत्व है।
इसके फैसले के खिलाफ कहीं अपील नहीं हो सकती ।
आइए आपको बताते है कि आप कैसे इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं?
- आपका कोई मुकदमा किसी दीवानी अदालत में हो और दोनों पक्ष इसे जल्द खत्म करना चाहते हो तो संबंधित अदालत को एक आवेदन लिखे कि हम इसे लोक अदालत में ले जाना चाहते हैं न्यायाधीश इसे तुरंत लोक अदालत में भेज देंगे ।
- किसी फौजदारी मुकदमे में (जो सुलहनिये हो) अगर दोनों पक्ष समझौता करना चाहते हो तो मिलकर आवेदन दे दें मामला तुरंत लोक अदालत में भेज दिया जाएगा।
- अगर एक पक्ष भी अपने चल रहे मुकदमे को लोक अदालत में ले जाना चाहे तो वह भी आवेदन दे सकते हैं।
- न्यायाधीश या पदाधिकारी ठीक समझे तो इसे तुरंत लोक अदालत में भेज सकते हैं।
- अगर संबंधित न्यायाधीश या पदाधिकारी चाहे तो अपनी मर्जी से भी मुकदमे को लोक अदालत में भेज सकते हैं ।
- अगर आप बिना किसी अदालत में गए किसी मामले में सीधे लोक अदालत में ले जाना चाहते हैं तो यहां के कार्यालय में आवेदन दे ।
- लोक अदालत चाहे तो दोनों पक्षों को बुलाकर मामले का निपटारा सुलह के आधार पर कर सकती है ।
- किसी मामले में निपटारा होना यदि संभव ना हो तो लोक अदालत से संबंधित अदालत में वापस भेज सकता है।
जिला प्राधिकरण, बक्सर , बिहार द्वारा जनहित में जारी।। इन मामलों के अतिरिक्त आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 11 दिसंबर को होना है, इसके बारे में उन्होंने लोगों को जानकारी दिया लोक अदालत क्या है इसका क्या मुख्य उद्देश्य क्या है बारे में लोगों को उन्होंने बताया। मौके पर पैनल अधिवक्ता अरुणिमा कुमारी, रीमा कुमारी, अखौरी अशोक कुमार सिन्हा, दीपिका केशरी, चंद्रकला वर्मा, राकेश रंजन, अशोक पाठक, आदि मौजूद रहें।