
चतुर्दश धर्म आयोजन श्री कृष्ण की लीला अकथनिय एवं अकल्पनीय है| उन्होंने 25 वर्ष की उम्र में मथुरा में एक महती सभा का आयोजन कर अपना निश्चय सुनाया की हम अब मथुरा को छोड़कर समुद्र में द्वारकापुरी बनाएंगे हमारी राजधानी द्वारिका होगी और संपूर्ण आर्यावर्त हमारा राज्य होगा| योग माया से सभी मथुरा वासी को द्वारिका भेज कर स्वयं बलराम के साथ पधारे |श्री कृष्ण 16108 विवाह किए प्रत्येक पत्नी से 10 पुत्र एवं एक पुत्री का जन्म हुआ तथा सभी पत्नी पत्नियों के लिए दी जाने वाली सुविधाएं एक समान एवं पर्याप्त थी|नित्य एवं निरंतर पत्नियों के पास एवं साथ रहा करते थे| योगेश्वर श्री कृष्ण 16108 रूप धारण करके अपनी धर्म भार्याओ को गौरवान्वित करते थे |यह विवाह लीला अद्वितीय एवं अलौकिक है उन्होंने अपने कार्यकाल 128 वर्ष के दरम्यान अनेकों युद्ध किए एवं कराएं| जिसमें महाभारत अन्यतम है| 125 वर्षों में पृथ्वी से दैत्यवृत्ति का विनाश कर दिया किंतु अपने परिवार के लोगों की प्रति उनकी चिंता बढ़ने लगी क्योंकि ये धन बल एवं प्रतिष्ठा से उन्मुक्त हो रहे थे| भगवान ने ब्राह्मणों को जीवन में सम्मान किया परंतु उनके वंशधरो से ब्राह्मणों का भयंकर अपमान हुआ फलता ब्राह्मणों ने ऐसा अभिशाप दिया जो कभी किसी को नहीं मिला |56 करोड़ यदुवंशियों का ब्राम्हण के एक अभिशाप ने विनाश कर दिया और श्री कृष्ण अपनी आंखों से देखते रहे |यही श्री कृष्ण के जीवन चरित्र का सर्वोत्कृष्ट मिसाल है |वे अपने जीवन में सर्वाधिक महत्व धर्म का ही देते हैं| संबंध एवं संबंधी उनके प्रियतम के परिमाप का विषय नहीं है| जो धर्मानुसार आचरण करता है वह उनको प्रिय है और जिसे धर्म प्रिय है ही नहीं वह उनका भी प्रिय नहीं है |यही इस ईश्वर का तत्व एवं रहस्य इस भागवत महापुराण में वर्णित है |यही उपदेश एवं अन्य अन्तिम संदेश?भागवत महापुराण देता है |मानव समाज को कि मानिय सबहि राम के नाते अर्थात धर्मानुसार ही संबंध श्रेयस्कर है | सर्वजन कल्याण सेवा समिति द्वारा आयोजित इस 14 वें धर्मायोजन की आज 11.30 बजे पुर्णाहुति हुई |दिन के 1:00 बजे से 4:00 बजे तक भागवत की समापन कथा |दिन के 4:00 बजे से विशाल भंडारा प्रारंभ हुआ |प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी अपार जन समुदाय कथा एवं भंडारा से लाभान्वित हुआ | शुभम आभार समिति आप सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार समर्पित करती है जो आप श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किए तथा अधिकार समझ कर प्रसाद ग्रहण किए हम आप धर्म अनुरागी महानुभाव से अपेक्षा रखते हैं कि समिति को सदैव अपना आशीर्वचन देते रहेंगे|