महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर के प्रधानाचार्य प्रो. कृष्ण कांत सिंह के प्रधानाचार्य पद का कार्यभार ग्रहण करने के उपरांत सफलतापूर्वक एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मंगलवार को उनके कार्यालय में महाविद्यालय परिवार की ओर से केक काटकर एवं मिठाइयाँ वितरित कर हर्षोल्लास के साथ इस उपलब्धि का उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने उनके नेतृत्व में बीते एक वर्ष के दौरान महाविद्यालय में हुए उल्लेखनीय शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं संस्थागत विकास कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानाचार्य द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप महाविद्यालय के सभी विभागों में “महर्षि विश्वामित्र व्याख्यानमाला” की शुरुआत हुई। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न विभागों द्वारा नियमित रूप से व्याख्यानमालाओं का आयोजन किया जा रहा है, जो आज भी निरंतर जारी है। यह पहल महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को नई दिशा प्रदान करने वाली सिद्ध हुई है।
प्रधानाचार्य की पहल पर 13 मई 2026 को महाविद्यालय द्वारा हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित दो महत्वपूर्ण एंथॉलजी (पुस्तक संकलन) का कुलपति महोदय द्वारा लोकार्पण किया गया तथा सभी शिक्षकों को उसकी प्रतियाँ भेंट की गईं। इसे महाविद्यालय की एक ऐतिहासिक शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में देखा गया।
वक्ताओं ने बताया कि महाविद्यालय द्वारा एनएसएस एवं एनसीसी के माध्यम से निरंतर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं नेतृत्व क्षमता का विकास हो रहा है। हाल ही में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एनसीसी द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम इसकी उत्कृष्ट मिसाल है।
महाविद्यालय के इतिहास में पहली बार आयोजित त्रिदिवसीय “महर्षि विश्वामित्र वार्षिक खेल महोत्सव–2026” को भी प्रधानाचार्य के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में गिना गया। स्थानीय विधायक द्वारा उद्घाटित इस खेल महोत्सव ने व्यापक चर्चा बटोरी तथा विद्यार्थियों में खेल भावना, अनुशासन एवं शारीरिक-मानसिक विकास को नई गति प्रदान की।
विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे शहर में प्रचार रथ के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया गया तथा सभी विभागों द्वारा सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। चयनित छात्र-छात्राओं को कुलपति महोदय द्वारा प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाने से विद्यार्थियों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा।
प्रधानाचार्य के नेतृत्व में महाविद्यालय में पहली बार दो राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का सफल आयोजन किया गया, जिनमें देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने सहभागिता की। इससे महाविद्यालय की शैक्षणिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ हुई।
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि महाविद्यालय के सभी शिक्षकों ने अपने स्वैच्छिक अंशदान से 35 कुर्सियाँ एवं मेज उपलब्ध कराई, जिससे छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित हुई। साथ ही शिक्षकों के शैक्षणिक उन्नयन हेतु आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों से शिक्षकों में भी उत्साह का वातावरण बना है तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का निरंतर सहयोग महाविद्यालय की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सभी वक्ताओं ने कहा कि प्रधानाचार्य प्रो. कृष्ण कांत सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व, पारदर्शी कार्यशैली एवं सतत प्रयासों के कारण महाविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुशासन एवं संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। इसी खुशी में सभी ने केक काटकर एवं एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस ऐतिहासिक अवसर का उत्सव मनाया।
इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. नवीन शंकर पाठक, डॉ. अमन कुमार सिंह, डॉ. दीपक कुमार शर्मा, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव का सराहनीय योगदान रहा साथ ही डॉ अवनिश कुमार पांडेय, डॉ योगर्षि राजपूत, डॉ सुजित कुमार यादव,डॉ सैकत देवनाथ,डॉ पंकज कुमार चौधरी,डॉ रवि प्रभात, डॉ भरत कुमार,डॉ विरेन्द्र कुमार, डॉ रवि कुमार ठाकुर, डॉ इसरार आलम, डॉ जय प्रकाश मिश्रा, डॉ सिमा द्विवेदी, डॉ प्रीति मौर्या, डॉ निशांत कुमार,डॉ विरेन्द्र प्रसाद, डॉ ओम प्रकाश आर्या, डॉ शशिकला, डॉ डॉ राकेश कुमार तिवारी, डॉ अशोक कुमार, लेखापाल श्री चिन्मय प्रकाश झा,शिवम् भारद्वाज, संतोष कुमार,भोला पांडेय, धर्मेन्द्र सिंह, अरुण कुमार श्रीवास्तव, मो नौषाद सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।