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– जिलाधकारी ने बच्चों को ड्रॉप पिलाकर किया अभियान का शुभारंभ- एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा पिलाई जाएगी दवा

– 2.59 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाने का है लक्ष्य

– 5 वर्ष तक के बच्चों को जरूर दें “दो बूंद जिंदगी की”बच्चों में विकलांगता होने के प्रमुख लक्षणों में से एक पोलियो भी है। जिसको जड़ से खत्म करने के लिए जिले में पांच दिवसीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान की शुरुआत रविवार को हुई। जिलाधिकारी अमन समीर ने सदर प्रखंड स्थित छोटका नुआंव महादलित बस्ती में पल्स पोलियो का ड्रॉप बच्चे को पिलाकर अभियान की शुरुआत की। इसी क्रम में 28 अक्टूबर 2020 को होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता जागरूकता अभियान के तहत मतदान देने से संबंधित उपस्थित मतदाताओं को शपथ भी दिलाई गई। इस दौरान जिलाधिकारी अमन समीर ने बताया कि पोलियो एक गंभीर बीमारी है जो किसी व्यक्ति के शरीर को लकवाग्रस्त कर देता है। चूंकि छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है, इसलिए उसे इस बीमारी से संक्रमित होने का खतरा ज्यादा होता है। इसे होने से पहले ही खत्म कर देने के लिए 1 वर्ष से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। उन्होंने जिले के सभी परिजनों से अपने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन्हें पोलियो की दवा पिलाकर अभियान को सफल बनाने में जिला स्वास्थ्य विभाग की पूरी तरह सहयोग करने की अपील भी की। मौके पर उपविकास आयुक्त योगेश कुमार सागर, डीपीआरओ कन्हैया कुमार समेत जिला व सदर प्रखंड के स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।खतरनाक लकवाग्रस्त बीमारी है पोलियो :जिलाधिकारी अमन समीर ने बताया कि पोलियो एक खतरनाक लकवाग्रस्त वायरस जनित रोग है। बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उसे पोलियो का खतरा ज्यादा है। यह बीमारी विशेष रूप से रीढ़ के हिस्सों व मस्तिष्क को ज्यादा नुकसान पहुंचता है। इससे बचाव के लिए लोगों को अपने बच्चों को पोलियो की दवा जरूर पिलानी चाहिए। पोलियो ड्रॉप बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाए रखता है। आजकल पोलियो के के ऐसे भी लक्षण दिखते हैं, जिन्हें सहजता से पहचाना नहीं जा सकता है। इसके लिए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका और एएनएम का क्षमतावर्धन किया गया है। ताकि, वह गृह भ्रमण के दौरान वह बच्चों में शारीरिक विकृतियों की पहचान कर सकें। इसलिए हमें सावधान रहना जरूरी है। जिसके लिए अभियान चलाया जा रहा है।2.59 लाख से अधिक है लक्षित बच्चों की संख्या :जिला सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया कि पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान को सफल बनाने के लिए एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं द्वारा घर-घर जाकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की “दो बूंद” दवा पिलाई जाएगी। जिले में 0 से 5 वर्ष तक के लक्षित बच्चों की संख्या 2.59 लाख है। इसके लिए जिले में 757 टीम बनाई गई है। जिनके द्वारा कुल 2.85 लाख घरों में भ्रमण किया जाएगा। चौक-चौराहों पर भी दवा पिलाने के लिए जिले में 115 ट्रांजिट टीम बनाई गई है। इसके अलावा ईंट भट्ठों व घुमंतू आबादी वाले क्षेत्रों में भी दवा की पहुंच बनाने के लिए 12 मोबाइल टीम तैयार की गई है। सभी टीम की निगरानी के लिए 227 सुपरवाइजर भी तैयार किए गए हैं। एक सुपरवाइजर द्वारा 3 टीम का निरीक्षण किया जाएगा।कोविड संक्रमण से बचाव का रखा जाएगा ध्यान :प्रभारी जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया कि पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के दौरान कोविड संक्रमण से बचाव का पूरा ध्यान रखा जाएगा। कर्मियों द्वारा दवा पिलाने के समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा। संक्रमण को ध्यान में रखते हुए पूर्व की भांति बच्चों को ड्रॉप पिलाने के बाद हाथ में मार्कर से किसी तरह का निशान नहीं लगाया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी तरह से मास्क व ग्लव्स का उपयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है।

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