बक्सर नगर भवन में होने वाले चलंत लोक अदालत में कूल 179 मामलों का निष्पादन किया गया। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, पटना के निर्देशानुसार आज बक्सर जिले के नगर भवन, स्टेशन रोड में चलंत लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम कि जानकारी देते हुए देवेश कुमार अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर ने बताया कि देश भर की अदालतों में आज लाखों मामले लंबित हैं। इनका निराकरण जल्द से जल्द हो इसके लिए लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में बक्सर जिले के चयनित स्थानों पर 26 जून से 28 जून 2024 तक मोबाइल लोक अदालत का आयोजन किया जाना है। आम लोग अधिक से अधिक मोबाइल लोक अदालत में पहुंचकर विवादों का निपटारा करा सकें, इसके लिए एक मोबाइल वैन गांव-गांव दस्तक दे रही है। बक्सर में लोक अदालतों के जरिए विवादों का निपटारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार मंगलवार 26/04/2024 को बक्सर नगर भवन में बक्सर, इटाढी, राजपुर और चौसा प्रखंड के सुलहनिए वादों का निष्पादन कराया जाएगा। जिससे लोग अपनी बिजली, टेलीफोन, बैंक, इन्शुरनेंस, इत्यादि सुलहनीय वादों का निष्पादन मोबाइल लोक अदालत के केंद्र पर आ कर करवा ले l दिनांक 27/06/204 को डुमरांव, चौगाई, केसठ और नवानगर प्रखण्ड के मामले नवानगर प्रखण्ड कार्यालय या प्रखंड संसाधन केंद्र पर किया जाएगा। वहीं दिनांक 28 जून 2024 को ब्रह्मपुर, चक्की और सिमरी प्रखंड के मामले का निष्पादन ब्रह्मपुर प्रखंड के सभागार कछ में किया जाएगा। लोक अदालत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मोबाइल वैन लोगों को जागरुक करेगी। इसमें पीठासीन अधिकारी के रूप में पूर्व प्रधान नयायाधीश, (कुटुंब न्यायालय) बलराम सिंह न्यायिक पदाधिकारी के रूप में, रुकसाना बेगम, अधिवक्ता के रूप में और प्रभाकर मिश्रा समाज सेवक के तौर पर कार्य करेंगे। दिनभर चले इस चलंत लोक अदालत ने दाखिल खारिज के 118 मामले, भू मापी वाद के तीन मामले, अग्नि कांड के 07 मामले एवं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107 के कुल 50 मामले, न्यायालय में लंबित आपराधिक सुलहनिये के एक सहित कुल 179 मामलों का निष्पादन समाचार लिखे जाने तक हो चुका था। चलंत लोक अदालत के न्यायिक पदाधिकारी बलराम सिंह द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि यह लोक अदालत अगले दो दिनों तक आपके जिले में कार्य करेगी जिसमें उन्होंने आम जनमानस से अपील की है कि आप अपने क्षेत्र के बिजली से संबंधित सभी तरह के सुलानिय वाद को लेकर हमारे समझ आ सकते हैं। साथ ही इंश्योरेंस, बैंक ऋण, आदि के मामले को सुलह के आधार पर निस्पादन के लिए आप मोबाइल लोक अदालत के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। मौके पर कार्यालय कर्मी संजीव कुमार, सुनील कुमार, पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव, पी0एल0 वी0सुंदरम कुमार, अविनाश श्रीवास्तव, मौजूद रहें।

वही दूसरे कार्य क्रम में केंद्रीय कारा बक्सर के काराबंदी एवं व्यवहार न्यायालय, बक्सर में कार्यरत सभी न्यायिक पदाधिकारी, कर्मचारी गण पैनल अधिवक्ताओं के बीच आज दिनांक 26 जून 2024 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर द्वारा अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ दुरुपयोग निवारण दिवस जिसे नशा मुक्ति दिवस के नाम से भी जाना जाता है पर एक शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन अवर न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर देवेश कुमार द्वारा व्यवहार न्यायालय परिसर, बक्सर में किया गया। इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय, बक्सर श्री मनोज कुमार ने उपस्थित सभी न्यायिक पदाधिकारी को शपथ दिलवाया। जिसमे सभी न्यायिक पदाधिकारी, साथ ही पैनल अधिवक्ता राजेश कुमार, रिंकी कुमारी, आरती कुमारी, अखिलेश्वर कुमार दुबे, विधिक स्वयंसेवक शत्रुघ्न सिन्हा, कविन्द्र पाठक, अशोक कुमार, अंजुम कुमार रावत, रुकैया आदि भी मौजूद रहें।
केंद्रीय कारा, बक्सर में हुए जागरूकता कार्य क्रम में कारा बंदियों को संबोधित करते हुए अवर न्यायाधीश सह सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बक्सर देवेश कुमार ने कहा कि आज पूरी दुनिया नशे के चंगुल में फंसी हुई है। दुनिया का कोई भी ऐसा देश नहीं है जहां के लोगों को नशे कि लत नहीं लगी हो। भारत में तो स्थिति और भी बदतर हो रही है। यहां की बहुत बड़ी आबादी नशे की गिरफ्त में आ चुकी है। विशेषकर युवा वर्ग में बढ़ती नशाखोरी की प्रवृत्ति समाज व राष्ट्र के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। नशे की लत के कारण बहुत से नौजवानों का भविष्य बर्बाद हो चुका है। हमारे देश में नशा करने वाले युवा पीढ़ी के लोग अब चरस, हेरोइन, कोकीन,अफीम जैसा खतरनाक नशा करने लगे। देश भर में नशे का सामान बेचने वाले बड़े-बड़े नशा माफिया पनप गए हैं। जो स्कूलों, कॉलेजों में कम उम्र के नौजवानों को नशे का सामान बेचते हैं। घर से बाहर रहकर पढऩे वाले बहुत से छात्र इन नशा माफियाओं के चंगुल में फंसकर नशे की लत के शिकार हो जाते हैं। जब तक उनके घर वालों को असलियत का पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। नशीले पदार्थों के निवारण के लिए प्रत्येक वर्ष 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति दिवस मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने एक प्रस्ताव में 7 दिसम्बर 1987 से इसे मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य लोगों को नशे की बुरी आदत से छुटकारा दिलाना तथा उन्हें नशे से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाना हैं।यह अच्छी बात है कि इस दिन लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाता है। लोगों को सचेत किया जाता है, सावधान किया जाता है। मगर जब तक समाज व सरकार नशे को जड़ से समाप्त करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही नहीं करेगी तब तक नशे का व्यापार फैलता ही रहेगा। भारत में भी सरकार ने विभिन्न प्रकार के नशे के सामान की बिक्री पर रोक लगा रखी है। कई कानून भी बनाए हैं। मगर उन पर प्रभावी अमल नहीं हो पाता है। जिसके चलते खुलेआम नशे का कारोबार होता है। आज देश में कहीं से कोई भी व्यक्ति नशे का कोई भी सामान खरीद सकता है। उसे ना कोई रोकने वाला है ना कोई टोकने वाला है। नशे का सामान बेचने वाले सौदागर दिनों दिन धनवान होते जा रहे हैं। जिस कारण से उनका पुलिस व प्रशासन पर पूरा प्रभाव रहता है। जिसकी बदौलत वह शासन, प्रशासन से मिलकर सरेआम धड़ल्ले से अपना धंधा करते रहते हैं। नशे की प्रवृत्ति के खिलाफ हमारा समाज भी जागरुक नहीं है। इसी जागरूकता के लिए हम सभी आज यहां इकट्ठा हुए है। कहते हैं कि नशा हर अपराध की जड़ होता है। नशेड़ी व्यक्ति कोई भी बुरे से बुरा काम करने से नहीं झिझकता सकता है। अधिकांश अपराध नशे की धुन में ही किए जाते हैं। बढ़ते नशे के प्रचलन को रोकने के लिए हमें सरकार के भरोसे ही नहीं रहना होगा। इसके लिए हमें स्वयं भी प्रयास करने होंगे। हमें देखना होगा कि हमारे परिवार का कोई सदस्य तो नशे की तरफ नहीं जा रहा है। यदि ऐसा है तो हमें समय रहते उस को नियंत्रित करना होगा। यदि सभी लोग ऐसा करने लगेंगे तो धीरे-धीरे नशे की प्रवृत्ति कम होती चली जाएगी और एक समय ऐसा आएगा जब हमारा समाज, हमारा क्षेत्र, हमारा प्रदेश, हमारा देश नशा मुक्त बन सकेगा। मौके पर पैनल अधिवक्ता कुमार मानवेंद्र मौजूद रहें।