Thu. Apr 23rd, 2026

*🔕क्या आपकी संतान पढ़ाई मे कमजोर है!🔕* ***************************** किसी की जन्मकुण्डली मे विद्या विचार करने हेतु ,पंचम् भाव द्वितीय भाव ,पंचमेश, द्वितीयेश और गुरु का प्रावल्य देखना चाहिये।* पंचमेश बुध गुरु के साथ त्रिक भाव मे रहे तो जातक विद्या विहीन होता है। वही पंचमेश केन्द् और कोण मे स्थित है तो उसे विद्या मे बली समझना चाहिये।* बुध,गुरु,पंचमेश सूर्य के साथ असंगत हो तो मनुष्य मंदबुद्धि होता है।यदि वे अपने अपने भवन मे हो बुद्धिमान होता है। * लग्न स्थित गुरु ,राहु ,शनि ,बुध, शुक्र से दृष्ट हो तो वेद, विद्या, और संस्कार से परिपूर्ण होता है।* गुरु केन्द्र मे हो ,द्वितीयेश बुध हो, या शुक्र स्वग्रही हो या उच्च राशि का हो तो जातक गणित शास्त्र मे विद्वान होता है। *🌴विद्या प्राप्ति के उपाय-🌴* ———————– पंचमेश, नवमेश और लग्नेश की स्थिति देखते हुए उस ग्रह का रत्न धारण करने से विद्या बढ़ती है। गुरू ग्रह का जाप, पूजन और हवन के साथ साथ ब्राह्मण का आदर करने से भी विद्या प्राप्त होती है। सरस्वती देवी की उपासना करने से भी विद्या प्राप्त होती है। *विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।* *रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।* उपरोक्त मंत्र से सम्पुट कर दुर्गासप्तसती का पाठ करवाने से विद्या लाभ होता है। भवन का वास्तु दोष ठीक करने और पितृदोष की शांति कराने से लाभ होता है। अपनी संतान का योग्य ज्यौतिषाचार्य से जन्म पत्री दिखलाकर योग्य आचार्य से उपाय कराने से अवश्य ही लाभ होता है। 🙏 *प्रो 0 मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री🙏* *कर्मकांड केसरी याज्ञिक सम्राट्* चरित्रवन बक्सर बिहार

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