
जिला कृषि पदाधिकारी की अध्यक्षता में एप्प उपयोग करने की दी गई जानकारीबक्सर: जैविक खेती, टपक सिंचाई व भूमि संरक्षण से जुड़ी सभी योजनाओं का अनुश्रवण अब जल-जीवन-हरियाली एप्प से होगा। उक्त बातें जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि ऑनलाईन गतिविधि से जोड़कर योजना के क्रियान्वित करने से ससमय योजनाओं का संपादन किया जा सकेगा। जल-जीवन-हरियाली एप्प क्या है: जल-जीवन-हरियाली एप्प ऑलनाईन अनुश्रवण करने की प्रणाली है, जिसे एन्ड्रॉयड फोन के माध्यम से गूगल प्ले स्टोर पर जाकर डाउनलोड किया जाता है। इस एप्प में यूजर आईडी तथा पासवर्ड के माध्यम से लॉगीन करते हैं। लॉगीन करने के उपरांत जीपीएस ऑन कर जिस योजना की विस्तृत विवरणी अपलोड करना होता है, उस जगह पर सम्बंधित कर्मी को जाना होता है। सम्बंधित कर्मी को चयनित स्थल का तीन फोटोग्राफ जियो टैगिंग कर अपलोड करना होता है, जिसमें प्रथम फोटोग्राफ कार्य शुरु होने के पूर्व, दूसरा फोटोग्राफ कार्य प्रारंभ होने के समय तथा तीसरा फोटोग्राफ कार्य पूर्ण होने के समय अपलोड करना है। फोटोग्राफ अपलोड करते समय सम्बंधित कर्मी एप्प लोडेड सिस्टम मंे जीपीएस अनिवार्य रुप से ऑन रखेंगे। ऑनलाईन मॉनिटरिंग करने हेतु जिला स्तर तथा मुख्यालय स्तर पर केन्द्रीकृत अनुश्रवण प्रणाली विकसीत की गई है, जिसके द्वारा पंचायत स्तर पर कार्यान्वित जल-जीवन-हरियोली से सम्बंधित योजनाओं का अनुश्रवण किया जा सकता है।डीएओ श्री मनोज कुमार ने बताया कि इस प्रणाली से योजनाओं में डुप्लीकेसी की संभावना समाप्त हो जायेगी तथा जिस कर्मी के स्तर से योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायत पायी जाती है तो सीधे ऑनलाईन प्रणाली के माध्यम से जॉंचकर त्वरित कार्रवाई हो सकेगी। जल जीवन हरियाली एप्प का प्रशिक्षण मुख्यालय के विशेषज्ञ श्री राजीव कुमार ने जूम एप्प के माध्यम से दिया, जिसका स्थानीय स्तर पर प्रोजेक्टर के माध्यम प्रदर्शन भूमि संरक्षण के अभियंता तबरेज आलम द्वारा दिया गया। योजना के क्रियान्वयन के क्रम में एप्प पर फोटोग्राफ अपलोड कराने की जवाबदेही कृषि समन्वयक,एटीएम,बीटीएम, डब्लूडीटी को दी गई है। बैठक में सहायक निदेशक,रसायन श्रीमती वसुंधरा, सहायक निदेशक,पौधा संरक्षण श्री गिरीराज कुमार, आत्माकर्मी चंदन कुमार सिंह सहित विभागीय कर्मी मौजूद थे।