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बक्सर। जगन्नाथ रथ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक अनुष्ठानों में से एक मानी जाती है। यह देश के विभिन्न जगहों में प्रत्येक वर्ष बहुत धूमधाम से आयोजित की जाती है। इस्कॉन मंदिर पड़री, बक्सर द्वारा बक्सर में पहली बार इस रथ यात्रा महामहोत्सव का आयोजन किया गया। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर मनोहर मुद्रा में स्थापित किए जाते हैं। इस दौरान उनके विशाल भव्य एवं सुसज्जित रथ को सैकड़ो भक्त श्रद्धा पूर्वक खींचते हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ इस्कॉन मंदिर पड़री बक्सर में पूजा आरती के पश्चात् भगवान जगन्नाथ, बलदेव जी एवं माता सुभद्रा के विग्रह को सुसज्जित विशाल रथ पर आरूढ़ किया गया। तत्पश्चात् गोलंबर स्थित हनुमान मंदिर के पास रथ पर दीप प्रज्ज्वलित किया गया। रोहतास गोयल, राजा गोविंद दास, डॉ रमेश कुमार, शशिकांत सिंह उर्फ मुन्ना जी, हरि प्रेम जी जिऊतमुनि उपाध्याय द्वारा दीप प्रज्जलन किया गया। तत्पश्चात् भगवान का महा आरती किया गया। कीर्तन एवं अलग-अलग जगह चौक पर भगवान का आरती किया गया।सिंडिकेट, यमुना चौक, मुनीम चौक, पीपल पाती रोड, पुलिस चौकी, कॉलेज गेट चरित्रवन, आईटीआई ,अंबेडकर चौक, रेलवे स्टेशन, ज्योति चौक होते हुए गोयल धर्मशाला में महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ।

इस यात्रा में रथ की राशियों को छूना या खींचना बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस्कॉन मंदिर के प्रबंधक सह संस्थापक राजा गोविंद दास ने कहा कि इन रस्सियों को छूने या खींचने के पीछे कई विशेष मान्यताएं हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान से सीधा जुड़ाव होता है और उनकी कृपा होती है। मोक्ष की प्राप्ति होती है। पापों का नाश होता है। इस्कॉन बक्सर के संस्थापक सदस्य सह प्रबंधकारिणी सदस्य सह स्मृति ग्रुप आफ इंस्टीच्यूशन के निदेशक डॉ रमेश कुमार ने कहा कि रथ यात्रा में किसी भी जाति ,धर्म या सामाजिक स्थिति का व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के रस्सी को खींच सकता है। यह रस्सियां सभी भक्तों को एक साथ लाती हैं। जो पूरी दुनिया को एकता और समानता का संदेश भी देती है।

ओंकार दास, इस्कॉन मसरख के ही धीरदशरथ दास, कृष्ण चरण दास, रोशन राज, हीरालाल दास, करणवीर दास, सूरज जी ने मधुर कीर्तन से बक्सर वासियों को आनंदित किया। वृंदावन से आए योगेश्वर दास ने अपने प्रवचन से भक्तों को लाभान्वित किया। पटना इस्कॉन से कृष्ण कृपा दास जी, प्रदीप दुबे, सत्यदेव प्रसाद ,अनूप सिंह, नंदकुमार जायसवाल, डॉ महेंद्र प्रसाद, डॉक्टर रंगना तिवारी , विजय वर्मा,विकास यादव ,राहुल, आकाश, संतोष कुमार, रंजीत ,धीरज ,सत्येंद्र, राम प्रतीक, दर्जनों मातृशक्ति सहित सैकड़ो भक्तों ने रथ खींचकर पुण्य का भागी बनने का कार्य किया। पहली बार निकली इस रथ यात्रा महा महोत्सव में शामिल होकर बक्सर के भक्त वृंद प्रशंसा करते थक नहीं रहे थे।

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