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बक्सर: किसानों को वैज्ञानिकों का साथ मिले तो हरित क्रांति का सपना खेतों में अवश्य दिखेगा। इस मद्येनजर जिले के आत्मा संस्थान द्वारा संयुक्त कृषि भवन,बक्सर के सभागार में दिन मंगलवार को दो दिवसीय कृषक वैज्ञानिक वार्Ÿाालाप कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आत्मा के परियोजना निदेशक श्री मनोज कुमार ने बताया कि इसका उदेश्य किसानों को मौसमी फसलों का बुवाई से कटाई तक प्रबंधन करना है। इसमें आत्मा के मार्गदर्शिका के अनुसार प्रत्येक वर्ष वार्तालाप आयोजित किया जाता है, जिसमें मौसमी फसलों के अनुसार फसल प्रबंधन पर चर्चा की जाती है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान किसानों ने रबी मौसम सम्बंधित समस्याओं से वैज्ञानिकों को अवगत कराया। आत्मा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री मनोज कुमार ने किसानों को कृषक हितार्थ समूह से जुड़ने की सलाह दी ताकि संगठनात्मक तरिके से मानवबल का उपयोग कर सामूहिक खेती को बढ़ावा मिल सके। इससे फसल के आर्थिक लागत में कमी के साथ बाजार आसानी से उपलब्ध हो जाता है। कृषि विज्ञान केन्द्र,बक्सर के मृदा विशेषज्ञ डाॅ. देवकरण ने बताया कि फसलों का ससमय प्रबंधन न होने से उत्पादन प्रभावित होता है। इस हेतु समयानुसार फसल प्रबंधन बेहद जरुरी है। उन्होंने सत्रह पोषक तत्वों के महत्व पर चर्चा की, जिसमें अधिकतर कृषक चार पोषक तत्वों नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस, पोटाश तथा जिंक के व्यवहार से अवगत हैं, शेष पोषक तत्वों के महत्व को जानने की आवश्यक्ता है ताकि उसकी ससमय भरपाई की जा सके। उन्होंने फसलों में रोग की पहचान कर कृषि वैज्ञानिक या प्रशिक्षित डीलर के सलाह से अनुशंसित मात्रा में कीटनाशक दवा प्रयोग करने की सलाह दी। केेभीके के पादप सुरक्षा विशेषज्ञ श्री रामकेवल ने बताया कि मूसर की फसलों में उकठा रोग की समस्या बनी रहती है। इससे निजात हेतु फसल चक्र को अपनाने के साथ-साथ बीज का उपचार अनिवार्य रुप से करेें। उक्त वार्तालाप का आयोजन दिनांक 16 नवंबर को भी जारी रहेगा। मौके पर उप परियोजना निदेशक बेबी कुमारी, बीटीएम विकास कुमार राय, आत्माकर्मी रघुकुल तिलक, चंदन कुमार सिंह, त्रिपुरारीशरण सिन्हा सहित प्रगतिशील कृषक ललन राम, लालजी प्रसाद, सच्चिदानंद शर्मा, मंजू देवी, सोनी देवी इत्यादि उपस्थित थे।

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