
बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग पर ट्रेनिंग लेने हेतु आत्मा द्वारा किसानों का दल रवानामास रॉंची में चार दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजनबक्सर: सभी मनुष्य प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रुप से कृषि पर ही निर्भर है। वर्तमान परिवेश में बढ़ती हुई जनसंख्या हेतु भोजन उपलबध कराना बड़ी चुनौती है साथ ही अपनी आय बढ़ाने हेतु किसान नई पद्धति की खोज कर रहे हैं। ऐसे समय में बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग महत्वपूर्ण विकल्प के रुप में उभर कर सामने आया है। इसी कड़ी में सदर प्रखंड स्थित बाजार समिति प्रांगण से कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण(आत्मा),बक्सर के तत्वावधान में राज्य के बाहर प्रशिक्षण अंतर्गत बायोफ्लॉक फिश फार्मिंग विषय पर चार दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल होने हेतु पचास कृषकों का जत्था मास,रॉंची रवाना किया गया। जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेशक,आत्मा श्री मनोज कुमार ने बताया कि मछली पालन में नई-नई तकनीक का इजाद हो रहा है। इन तकनीको का इस्तेमाल कर किसान बढ़िया मुनाफा कमा रहे है। इसी तरह की तकनीक का नाम बायोफ्लॉक है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के उदेश्य से जिले के किसानों को चार दिवसीय प्रशिक्षण पर भेजा गया है जो संस्थान में दिनांक 18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। उन्होंने मौके पर किसानों से अपील की कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत प्रशिक्षित कृषक सम्बंधित प्रखंड के अधिकाधिक किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। मास,रॉंची के कोर्स समन्वयक संदीप कुमार ने बताया कि चार दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान बायो फ्लोक फिश फार्मिंग पद्धति को समावेशित करते हुए किसानों को प्रशिक्षित किया जायेगा। किसानों के सुविधा हेतु जत्थे में टीम लीडर की प्रतिनियुक्ति की गई है, जिसमें श्री रामनारायण त्रिवेदी तथा दिनेश कुमार शर्मा शामिल हैं। क्या है बायो फ्लॉक तकनीकइस तकनीक में बायो फ्लॉक नामक एक बैक्टेरिया का इस्तेमाल होता है। सर्वप्रथम मछलियों को बड़े-बड़े टैंक में डाला जाता है। तत्पश्चात मछलियों को भोजन दिया जाता है। मछलियां जितना खाती है उसका 75 प्रतिशत मल के रूप में बाहर निकाल देती है। फिर इस मल को बायो फ्लॉक बैक्टीरिया प्रोटीन में बदलने का कार्य करता है। इसे मछलिया खा जाती है,जिससे उनका विकास तीव्र गति से होता है। बायो फ्लॉक बैक्टीरिया के कारण टैंक का पानी हमेशा साफ रहता है। गंदगी नही होने से मछलिया बीमारी से बची रहती हैं। मौके पर बीटीएम विकास कुमार राय, आत्माकर्मी चंदन कुमार सिंह, रघुकुल तिलक, त्रिपुरारी शरण सिन्हा सहित प्रगतिशील कृषक शिवरतन सिंह,भगवती सिंह, सत्येंद्र कुमार, पंचमी यादव, कृष्णा बिहारी राय, निरंजन सिंह, संकर पासवान, राम अवधेश सिंह,उत्तम सिंह,मदन गोप इत्यादि जत्थे में मौजूद थे।