
किसानों की बीच ऐसी मान्यता है कि फसलों के अवशेष(पुआल,भूसा,खुॅंटी आदि) को खेत में जलाने से खरपतवार एवं कीड़ों को खत्म किया जा सकता है ,लेकिन सच तो यह है कि इस क्रिया से फायदे से ज्यादा नुकसान है। किसानों के बीच इस धारणा को समाप्त करने हेतु कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण(आत्मा),बक्सर द्वारा जिले के सभी प्रखंडों में सुदूर ग्राम स्तर तक रबी जागरुकता रथ में एलईडी के माध्यम से वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित वृतचित्र को दिखाया जा रहा है। जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने बताया कि पराली जलाने की प्रथा को तोड़ने के लिए विभाग द्वारा अनेक कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। पराली जलाने से होने वाले नुकसान पर चर्चा करते हुए कहा कि मानव जीवन में सांस लेने की समस्या, ऑंखों में जलन, नाक समस्या,गले की समस्या प्रमुख है साथ मृदा में कार्बनिक पदार्थ की क्षति, जमीन में पाये जाने वाले लाभकारी सूक्ष्म जीवाणुओं का सफाया, मुख्य एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी इत्यादि प्रमुख है। आगे उन्होंने कहा कि कृषि यांत्रिकरण योजना के माध्यम से रीपर कम बाईंडर, स्ट्रॉ बेनर, हैप्पी सीडर तथा रोटरी मल्चर पर आकर्षक अनुदान की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसके अलावे जिले में कृषि यंत्र बैंक भी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें रियायती दर पर पराली प्रबंधन करने वाले यंत्र उपलब्ध रहेंगे। उन्होने हार्वेस्टर से फसलों की कटाई पर चर्चा करते हुए कहा कि सभी हार्वेस्टर मालिकों को अपने हार्वेस्टर में जीपीएस लगाना होगा साथ हार्वेस्टर में एसएमएस का प्रयोग कर ही फसलों की कटाई करेंगे, ऐसा नहीं करने वाले हार्वेस्टर मालिकों को चिन्हित कर विधिसम्मत कार्रवाई की जायेगी। कृषि विभाग द्वारा पराली जलाने वाले किसानों पर कार्रवाई भी की जा रही है, जिसमें किसानों का पंजीकरण पर रोक लगाते हुए कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये जा रहे सभी प्रकार के अनुदान से वंचित कर दिया जायेगा।