Wed. Aug 5th, 2026

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की भक्ति भाव से पूजा और आराधना करने से, जीवन के सभी प्रकार के सुखों को प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन क्या आपको पता है की महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की चारों पहर की पूजा का क्या महत्व है और इसे किस विधि विधान से किया जाता है?श्री मंदिर की इस ख़ास प्रस्तुति में आइए, जानते हैं, चार पहर क्यों होती है, भोलेनाथ की पूजा? और जाने समय और पूजा विधिपौराणिक कथा के अनुसार इसी रात्रि, भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती ने चारों पहर भगवान शिव की पूजा की थी। ये चारों पहर संध्याकाळ से प्रारंभ होकर, दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त में समाप्त होते हैं। यह पूजा, मुख्य रूप से जीवन के चार आधार धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को नियंत्रित करती है। हर पहर की पूजा का विशेष विधान है, महाशिवरात्रि पर चार पहर की पूजा अपने आप में बेहद ही अनूठी होती है। जिसके बारे में हम आपको बारी बारी से बता रहे हैं।पहले पहर की पूजा का समय और महत्वमहाशिवरात्रि के दिन सूर्यास्त के बाद पहले पहर की पूजा की जाती है। इस वर्ष पहले पहर की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:21 बजे से शुरू होकर 09:27 बजे समाप्त होगा। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा और मंत्रों का जाप करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी पापों का नाश होता है। लेकिन इस मुहूर्त में ऐसा क्या करें कि शिव की कृपा दृष्टि हर भक्त पर आसानी से पड़ जाए। तो इसके लिए इस पहर की शुरुआत करें शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के साथ और फिर पतली जल की धारा से अभिषेक करते हुए भगवान शिव का ध्यान करें और ॐ नमः शिवाय का जाप करें, चाहे तो आप शिव स्तुति भी कर सकते हैं। ऐसा करने से न सिर्फ आपका धर्म मजबूत होगा बल्कि शिव की कृपा भी प्राप्त होगी।यह तो थी प्रथम पहर की पूजा का उल्लेख लेकिन ध्यान रहे कि हर पहर की पूजा में भगवान शिव का ध्यान जरूर करें, और हर पहर की पूजा में भगवान शिव के अभिषेक के बाद उनके सामने दीपक जला कर, उनको माला अर्पित करके, बेलपत्र अर्पित करके विधिवत उनकी आरती भी करें। यकीनन भगवान शिव की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी।प्रथम पहर के बाद हम जानते हैं दूसरे पहर की पूजा, विधि और उसके महत्व को।दूसरे पहर की पूजा का समय और महत्वदूसरे पहर की पूजा रात में शुरू होती है। इस वर्ष इस पहर की पूजा का शुभ मुहूर्त रात 9.27 बजे से 12.33 बजे तक है। इस दौरान शिवलिंग पर दही अर्पित कर जल की धारा से शिवलिंग का अभिषेक करें। बाद में कपूर जलाकर भगवान शिव की आरती करें।ध्यान रहे कि दूसरे पहर में आपको भगवान शिव के सर्व शक्तिशाली मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप अवश्य करना चाहिए, इससे न सिर्फ धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होती है बल्कि सुख-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। यहां दूसरे पहर की पूजा समाप्त हो जाती है और इसके बाद तीसरे पहर की पूजा प्रारंभ होती है।तीसरे पहर की पूजा का समय और महत्वतीसरे पहर की पूजा आधी रात को की जाती है। शास्त्रों के अनुसार तीसरे पहर की पूजा में गाय का शुद्ध घी, भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए और इसके बाद जल धारा से उनका अभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि इस दौरान शिव स्तुति करना विशेष फलदायी होता है। अगर आपके लिए यह संभव नहीं हो पा रहा है, तो आप शिव के पंचाक्षर मंत्र , ॐ नमः शिवाय का जाप भी कर सकते हैं और भगवान शिव का ध्यान कर अपने जीवन की डोर उनके साथ बांध सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि, तीसरे पहर की पूजा से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है।चौथे पहर की पूजा का समय और महत्वचौथे पहर की पूजा अगले दिन सुबह की जाती है। इस वर्ष पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 3:39 से सुबह 6:45 बजे तक है। इस दौरान शिवलिंग को शहद अर्पित कर जल की धारा से उनका अभिषेक करना चाहिए। इस पहर भगवान शिव के मंत्र जाप और उनकी स्तुति, दोनों ही फलदायी होती है। इस चौथे पहर की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष का अधिकारी हो जाता है।अगर आप चार पहर की पूजा नहीं कर पा रहे है, तो ऐसी दशा में आप, सिर्फ तीसरे पहर में भगवान शिव का ध्यान और उनके मंत्र का उच्चारण कर सकते हैं, इस भक्ति में भी भगवान शिव आपकी हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं।महाशिवरात्रि में चार पहर की, पूरे विधान से की गई पूजा, अति लाभकारी होती है। पूरी आस्था और श्रद्धा से की गई यह पूजा, पूरी उम्र के पापों का निवारण है। आप भी पूर्ण भक्ति और आस्था के साथ महादेव शिव की अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करें, इसी मंगल कामना के साथ। हमे दीजिये इज़ाजत। ॐ नमः शिवाय।

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