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माननीय पटना उच्च न्यायालय, पटना एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश के आलोक में आज दिनांक 2 अक्टूबर 2023 को महात्मा गांधी की 154वीं जन्मदिवस के अवसर पर एक श्रद्धेय श्रद्धांजली, कार्यक्रम, -सह- बक्सर, जिले में बने लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के कार्यालय का विधिवत उद्घाटन कार्यक्रम पटना उच्च न्यायालय, पटना एवं राज्य प्राधिकार, पटना द्वारा वर्चुअल माध्यम से ई इनॉग्रेशन ऑनलाइन किया गया। मौके पर अपने संबोधन में जिला एवं सत्र न्यायाधीश -सह- अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर आनंद नंदन सिंह ने कहा कि, बक्सर जिले के निवासी इस लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम का इंतजार काफी दिनों से कर रहे थे।आज महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर इसका उद्घाटन करके राज्य प्राधिकार, पटना ने आम लोगो को काफी सुखद संदेश दिया है। उन्होंने कहा की आज हम सभी यहां 2 अक्टूबर, सन 1869 को जन्मे महात्मा गांधी की जयंती मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। आज “राष्ट्रपिता” मोहनदास करमचंद गांधी की 154वीं जयंती है। जिन्हें भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। हम उन्हें प्यार से ‘बापू’ भी कहते हैं। उन्होंने अपने शक्तिशाली प्रण ‘अहिंसा’ का उपयोग करके भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके सम्मान में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 15 जून, 2007 को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया।
गांधी जयंती हमें उनके शांति और अहिंसा के सिद्धांतों की याद दिलाती है। प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती पर, हमें भारत को स्वतंत्र कराने के लिए गांधीजी के प्रयासों की याद दिलाई जाती है। उन्होंने एक लंबा संघर्ष सहा ताकि भारत के लोग एक स्वतंत्र राष्ट्र में रह सकें। उनका सत्य और अहिंसा में दृढ़ विश्वास था। उनका पसंदीदा गीत, “रघुपति राघव राजा राम,” उनकी याद में गाया जाता है। गांधी जयंती के मौके पर देश में राष्ट्रीय अवकाश भी रहता है। इस दिन सभी स्कूल, कॉलेज, निजी कार्यालय और सरकारी संगठन बंद रहते हैं।गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। उनका जन्म 1869 में पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। 1888 में उन्होंने यूके में कानून की पढ़ाई पूरी की और बाद में कानून का अभ्यास करने के लिए दक्षिण अफ्रीका चले गए। 21 साल बाद जब वे भारत लौटे तो उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन या सत्याग्रह शुरू किया। उन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी के लिए लड़ने के लिए अहिंसा का इस्तेमाल किया। कार्यक्रम को आगे बढाते हुए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी -सह- प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर देवराज ने कहा कि बापु, महात्मा गांधी जी एक महान नेता थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए खादी की धोती पहनी थी। उन्होंने लोगों को खुद पर भरोसा रखने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने असहयोग आंदोलन शुरू किया जिसमें उन्होंने भारतीयों से अंग्रेजों के साथ सहयोग न करने और अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने का आग्रह किया। गांधीजी ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए समर्पित कर दिया। वह गोपाल कृष्ण गोखले से जुड़ गए, जो पहले से ही भारत की आजादी के लिए लड़ रहे थे। इस संघर्ष के दौरान गांधीजी को कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण आंदोलनों का नेतृत्व किया। 1930 में उन्होंने नमक पर ब्रिटिश एकाधिकार का विरोध करने के लिए 400 किलोमीटर पैदल चलकर दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह शुरू किया। भारत छोड़ो आंदोलन अंग्रेजों को भारत छोड़ने का आह्वान था।अपने पूरे जीवन में गांधीजी ने कई महान कार्य किए जो आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं। उन्होंने स्वराज, अस्पृश्यता के खिलाफ, महिलाओं के अधिकारों और किसानों की आर्थिक भलाई के लिए अथक प्रयास किया। उनके समर्पण और संघर्ष के कारण भारत को 200 वर्षों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से आजादी मिली। मौके पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मनोज कुमार द्वितीय, विजेंद्र कुमार, दीपक भटनागर सहित सभी अन्य न्यायाधीश, कार्यालय कर्मी, संजय कुमार, राजीव कुमार, संतोष द्विवेदी, सुधीर कुमार, सुनील कुमार, सुमित कुमार आदि वही पैनल अधिवक्ता प्रमोद कुमार मिश्रा, शेषनाथ ठाकुर सुरेश प्रसाद प्रीति कुमारी, कुमारी अरुणिमा, कुमार मानवेंद्र आदि एवं विधि सेवक कविंद्र नाथ पाठक, सरोज यादव, अशोक कुमार, अविनाश कुमार, अंजुम कुमार रावत, रुकैया, दीपक, अंशु, आदि उपस्थित थे।
सभी को महात्मा गांधी, बापू की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!

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