
बक्सर: देश की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर बक्सर जिले के छः प्रखंडों में कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण(आत्मा),बक्सर द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें किसानों की आय में वृद्धि एवं रोजगार सृजन, जलवायु के अनुकूल कृषि कार्य एवं कृषि तथा कृषि से सम्बद्ध नवीनतम तकनीकी आधारित विषयों पर किसान गोष्ठी का आयोजन दिनांक 25 अक्टूबर 30 अक्टूबर तक बकरीपालन,मुर्गीपालन,मधुमक्खीपालन,मशरुम, जलवायु के अनुकूल खेती व हैण्डीक्राफ्ट विषयों पर विभिन्न प्रखंडों में आयोजित किया जायेगा। इसी कड़ी में जिले के चौसा प्रखंड में दिन मंगलवार को रबी महाभियान के साथ मुर्गीपालन विषय पर अमृत महोत्सव का आयोजन किया गया। किसानों को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी श्री मनोज कुमार ने बताया कि खेती के बाद पशुपालन को मुख्य व्यवसाय माना जाता है। आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मुर्गीपालन एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके जरिए घर की महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। आगे उन्होने धान अधिप्राप्ति पर चर्चा करते हुए कहा कि दिनांक 01 नवंबर से धान अधिप्राप्ति होना प्रस्तावित है। इस तिथि के पूर्व इच्छुक कृषक बीटीएम,एटीएम, कृषि समन्वयक,किसान सलाहकार से संपर्क स्थापित कर धान अधिप्राप्ति हेतु पंजीकरण अवश्य करा लें। उन्होंने अनुदानित दर पर तेलहन एवं दलहन बीज प्राप्त करने हेतु किसानों से ऑनलाईन आवेदन करने की बात कही। अगर किसान को ऑनलाईन आवेदन प्रक्रिया में समस्या हो तो इस परिस्थिति में सम्बंधित पंचायत के कृषि समन्वयक या किसान सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं। सहायक निदेशक,पौधा संरक्षण गिरीराज कुमार ने बीज टीकाकरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिट्टीजनित एवं बीज जनित रोग से मुक्ति हेतु रबी फसलों के बीज का अनिवार्य रुप से टीकाकरण करें। आत्मा के प्रभारी उप परियोजना निदेशक विकास कुमार राय ने सामूहिक खेती पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रगतिशील कृषक आत्मा के माध्यम से कृषक हितार्थ समूह तथा खाद्य सुरक्षा समूह का गठन कर आत्मा द्वारा संचालित सभी कार्यक्रमों को लाभ उठा सकते हैं। किसानों के सवाल पर उन्होंने बताया कि धान फसल में बीपीएच का प्रकोप होने पर प्रति एकड़ 120 ग्राम चेश का प्रयोग कर सकते हैं। सहायक निदेशक,कृषि अभियंत्रण प्रियंका कुमारी ने पराली प्रबंधन वाले यंत्रों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति का ह्रास हो रहा है। इस परिस्थिति में स्ट्रा रीपर, हैप्पी सीडर,सुपर सीडर इत्यादि यंत्र महत्वूपर्ण विकल्प के रुप में उपलब्ध हैं। बीर कुॅंवर सिंह कृषि महाविद्यालय,डुमरॉंव के विशेषज्ञ आर.के.सहाय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र,बक्सर के वैज्ञानिक डॉ देवकरण द्वारा रबी मौसम में उगायी जाने वाली फसलों के प्रबंधन पर प्रकाश डाला गया। मौके पर बीएफएसी अध्यक्ष धर्मेन्द्र राय, प्रभारी बीटीएम विपिन कुमार शर्मा, एटीएम धर्मेन्द्र कुमार सिंह सहित सभी प्रसार कर्मी एवं अनेक प्रगतिशील महिला एवं पुरुष प्रगतिशील कृषक मौजूद थे।