
बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार बक्सर में विगत तीन दिनों से चल रहे मोबाइल लोक अदालत का आज सफल समापन हो गया। समापन कार्यक्रम बरहमपुर प्रखंड के सभागार कक्ष में मनाया गया। मौके पर इस लोक अदालत में आज कुल 168 मामलों का निष्पादन किया गया। जिसमें सिमरी, चक्की एवम ब्रह्मपुर प्रखंड से कुल 48 दाखिल खारिज के मामले, धारा 107 के कुल 68 मामले, बिजली विभाग के कुल 20 मामले साथ ही बैंक ऋण के 16 एवम प्री लिटिगेशन के 16 मामले का निस्पादन किया गया। बैंक ऋण से संबंधित मामलों में से कुल 11,67,500 रुपए की वसूली की गई। मौके पर देवेंद्र प्रसाद केसरी पूर्व प्रधान न्यायाधीश, न्यायिक पदाधिकारी चलंत लोक अदालत द्वारा एक विधिक जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। जिसमें उन्होंने आम लोगों को यह बताया कि लोक अदालत जनता की अदालत है। जिसमें आप अपनी आपसी सहमति से अपने मुकदमों का निपटारा सुलह के आधार पर करवा सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार की मदद से अब देश के पूरे राज्य में एक ही दिन राष्ट्रीय लोक अदालत का भी आयोजन किया जाता है। निरंतर वर्ष में चार राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाता रहा है। जिसमें काफी मात्रा में वादों का निष्पादन होते आ रहा है। यह लोक अदालत आपके जिले में कार्यरत व्यवहार न्यायालय में आयोजित की जाती है। इसमें यदि आप पर कोई मुकदमा पूर्व से चल रहा हो और आपसी सुलह से आप इस बात का निपटारा करवाना चाहते हैं तो निपटारे के लिए एक आवेदन आप संबंधित न्यायालय में या कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में दे सकते है। जिससे आपके मामले को चिन्हित कर इसे राष्ट्रीय लोक अदालत में निष्पादन हेतु चिन्हित कर रख दिया जाएगा। इसके अलावा बीमा , मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम, घरेलू हिंसा, परिवारिक वाद, बिजली से संबंधित वाद, आपराधिक और दीवानी मामले का भी निपटारा लोक अदालत में आकर करवा सकते हैं। मौके पर अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं अनिल कुमार सिंह गैर न्यायिक अधिवक्ता सदस्य ने बताया कि लोक अदालत आपसी सुलह समझौता से वाद को निपटारा करवाने का एक सुलभ न्यायालय हैं। जिसमें वादों को सुलझाने से व्यवहार न्यायालय में बढ़ रहे मुकदमों के बोझ को भी आप कम कर सकते हैं। इसकी कही अपील भी नही होती है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (National Legal Services Authority-NALSA) द्वारा आयोजित लोक अदालत, विवादों का निपटान करने का एक वैकल्पिक तरीका है।(Alternative Method Of Dispute Resolution)। यह एक ऐसा मंच है, जहां न्यायालयों में लंबित वाद-विवाद/मुकदमे या प्री-लिटिगेशन चरण के मामलों का सौहार्दपूर्ण निपटारा किया जाता है।
लोक अदालतों को विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) के तहत वैधानिक दर्जा दिया गया है। इस अधिनियम के तहत, लोक अदालतों द्वारा दिए गए निर्णय को सिविल न्यायालय का निर्णय माना जाता है, जो सभी पक्षों पर अंतिम और बाध्यकारी होता है। ऐसे निर्णयों के बीच किसी भी अदालत के कानून के समक्ष अपील नहीं की जा सकती है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय से लेकर तालुक न्यायालयों(Taluk Courts) तक सभी न्यायालयों में मुकदमों (प्री-लिटिगेशन और पोस्ट-लिटिगेशन दोनों) के निपटारे के लिए एक दिन के लिए राष्ट्रीय लोक अदालतें आयोजित की जाती हैं। विवादों के समाधान हेतु समाज के सभी वर्गों के लिए इस वैकल्पिक विवाद निवारण (ADR forum) को सुलभ बनाने एवं कोविड-19 महामारी के द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों को दूर करने के लिए, विधिक सेवाएं प्राधिकरणों (Legal Services Authorities) द्वारा वर्ष 2020 में वर्चुअल लोक अदालत यानी ई-लोक अदालत शुरू की गईं। प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर ई-लोक अदालतों ने लाखों लोगों को अपने विवाद निपटाने के लिए एक नया मंच उपलब्ध कराया है। मौके पर समाज सेवा के रूप में कार्य कर रहे गैर न्यायिक सदस्य प्रभाकर मिश्रा, कार्यालय कर्मी संजीव कुमार,प्रखंड सहायक अमित कुमार, अख्तर अली आदि मौजूद रहे।