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बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार पटना के निर्देशानुसार राष्ट्रीय संविधान दिवस 26 नवंबर 2025 के अवसर पर आज व्यवहार न्यायालय, बक्सर के परिसर में माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश , श्री हर्षित सिंह द्वारा संविधान की प्रस्तावना का पाठ उपस्थित व्यवहार न्यायालय के न्यायाधीशों साथ ही बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं, पैनल अधिवक्ता, पारा विधिक स्वम सेवक, व्यवहार न्यायालय के न्यायिक कर्मचारीगण एवं उपस्थित सभी आम जनों को प्रस्तावना का पाठ पढ़ाया गया।कार्यक्रम की शुरुआत पुरवाहन में 10: 15 में हुई। इस अवसर पर माननीय द्वारा कहा गया कि संविधान एक मौलिक कानून है। जो किसी देश का संचालन करने, सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा तथा कार्य निर्धारण करने एवम नागरिको के हितो का संरक्षण करने के लिए नियम दर्शाता है। भारत का संविधान, भारत का सर्वोच्च विधान है। जो संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ।

यह दिन (26 नवम्बर) भारत के संविधान दिवस के रूप में घोषित किया गया है। जबकि 26 जनवरी का दिन भारत में गणतन्त्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।

मौके पर श्री महेश्वर नाथ पांडे माननीय अवर न्यायाधीश – सह प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर ने कहा कि किसी देश या संस्था द्वारा निर्धारित किए गए वह नियम जिसके माध्यम से संस्था का सुचारु ढंग से संचालन हो सके उसे देश या संस्था का संविधान कहा जाता है। भारत का संविधान, संविधान सभा द्वारा 26 जनवरी 1950 को आंशिक रूप से संपूर्ण देश में लागू कर दिया गया था। संविधान दो प्रकार के होते हैं, एक लिखित संविधान और दूसरा अलिखित। विश्व का प्रथम लिखित संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका का है, और संसार का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का है।

 

वर्तमान में, भारत का संविधान 470 अनुच्छेद जो 25 भागों और 12 अनुसूचियों में लिखित है और जिसे 106 बार संशोधित किया गया है। जिस समय संविधान लागू हुआ था, उस समय 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचि और 22 भाग थे। संविधान में समय– समय पर कई संशोधन किए जाते हैं। प्रत्येक देश के संविधान की अपनी विशेषताएं होती है, जिनकी सहायता से उस देश की सम्पूर्ण व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है। संविधान, किसी भी देश का मौलिक कानून है। जो सरकार के विभिन्न अंगों की रूपरेखा और मुख्य कार्य का निर्धारण करता है। साथ ही यह सरकार और देश के नागरिकों के बीच संबंध भी स्थापित करता है।

भारतीय संविधान का निर्माण एक विशेष संविधान सभा के द्वारा किया गया है और इस संविधान की अधिकांश बातें लिखित रूप में है।

इस दृष्टिकोण से भारतीय संविधान, अमेरिकी संविधान के समतुल्य है। भारत का संविधान लिखनें में 2 वर्ष 11 महीनें 18 दिन का समय लगा था। वर्तमान में भारतीय संविधान को 25 भागों में लिखा गया है, जिसमें लगभग 470 अनुच्छेद हैं। मूल रूप से, संविधान में 22 भाग और 395 अनुच्छेद थे, लेकिन संशोधनों के बाद, भाग 25 हो गए हैं और अनुच्छेदों की संख्या 470 (या 448, विभिन्न स्रोतों के आधार पर) तक बढ़ गई है।भारतीय संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति में 251 पृष्ठ और 3.75 किलोग्राम वजन है। हालांकि, इसकी विभिन्न मुद्रित संस्करणों की संख्या और वजन अलग-अलग होते हैं। भारतीय संविधान की मूल हस्तलिखित प्रति का वजन लगभग 3.75 किलोग्राम है, जिसे प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने लिखा था। हालाँकि, संसद में रखी गई मूल पांडुलिपि का वजन लगभग 13 किलोग्राम है। हांलांकि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 तक पूर्णतः बन चुका था। किन्तु लागू 26 जनवरी 1950 में किया गया था। संविधान सभा को ड्राफ्टिंग कमेटी भी कहा जाता है और इसका गठन 6 दिसंबर 1946 को हुआ था। संविधान सभा के प्रमुख सदस्य डॉ राजेन्द्र प्रसाद, भीमराव अम्बेडकर, सरदार वल्लभ भाई पटेल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आजाद थे। इनके अतिरिक्क लगभग सभी राज्यों, धर्मो और जातियों से विभिन्न सदस्य शामिल थे।

 

इस अवसर पर व्यवहार न्यायालय, बक्सर के प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय श्री मनोज कुमार प्रथम , जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, मनीष शुक्ला , सुदेश कुमार श्रीवास्तव, अमित कुमार शर्मा, मानस कुमार वत्सल,अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, महेश्वर नाथ पांडेय, न्यायिक दंडाधिकारी, गौरव कुमार सिंह, चंदन कुमार एवम अन्य न्यायिक पदाधिकारी, वरीय कर्मचारी राजीव कुमार श्रीवास्तव,संजय कुमार, कुंदेन्दु कुमार दूबे, संतोष कुमार द्विवेदी, धनंजय कुमार नीरज,अमरेंद्र भारती, दीपक गुप्ता,कहकंशा परवीन,आशीष रंजन,किरण कुमारी, शैलेश ओझा,नीरज कुमार, अमर नाथ चौधरी, अशोक कुमार, सुनील कुमार, दीपेश श्रीवास्तव, सुमित कुमार आदि उपस्थित रहें।

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