
{ *सिद्धाश्रम बक्सर की पंचक्रोशी परिक्रमा }* 🔸🔸🔸🔹🔹🔹🔹🔸🔸🔸भारतवर्ष के प्राचीनतम परम-पावन तीर्थों में सिद्धाश्रम भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तीर्थ है। मुगलसराय हावडा़ रेल लाइन ( मेन लाइन ) पर बक्सर शहर है। सतयुग में श्रीवामन विष्णु भगवान् का अवतार यहीं हुआ था, इसलिये इस पावन तीर्थ का नाम ‘ वामनाश्रम ‘ भी है। यहाँ पर एक प्राचीन सरोवर ‘ व्याघ्रसर है, जिसे आजकल ‘कवलदह नाम से जाना जाता है, जो बक्सर रेल स्टेशन के समीप रोड पर ही है, इसी सरोवर के नाम पर इस तीर्थ को व्याघ्रसर कहते हैं। व्याघ्रसर का ही अपभ्रंश बघसर, बगसर या बक्सर बन गया है। बक्सर के चरित्रवन में महर्षि विश्वामित्र का आश्रम था, जहाँ भगवान् विष्णु ही श्रीराम नाम धारण कर यहाँ पर पधारे थे। सुबाहु, तथा ताड़का राक्षसी जो वैदिक सनातन परम्परा के विध्वंसक एवं आतंक के पर्याय थे,उन्हें महर्षि श्रीविश्वामित्र का निर्देश पाकर भगवान् ने इनका वध कर उद्धार किया था तथा विश्वामित्र जी द्वारा समायोजित यज्ञ की रक्षा की थी। यह पावन तीर्थ गंगाजी के पुण्य तट पर बसा है ; इसके आसपास श्रीगौतम, श्रीनारद, श्रीभृगु तथा श्रीउद्दालक ऋषियों के आश्रम थे जिसकी परिक्रमा प्रतिवर्ष की जाती है। इस तीर्थ की परिक्रमा मार्गशीर्ष कृष्णपक्ष पंचमी को प्रारम्भ होती तथा इसका समापन नवमी को चरित्रवन ‘ विश्वामित्र ह्रद’ अवस्थित भगवती भागीरथी गंगाजी से आविर्भूत श्रीलक्ष्मीनारायण भगवान् के मन्दिर परिसर में होता है, जहाँ विशेषरूप सेतीर्थयात्री ‘लिट्टी-चोखा’ ( बॉटी चोखा ) भोग लगाकर स्वयं भोजन करते हैं। ऐसे तो पुरे बक्सर में ही लिट्टी-चोखा लोग बनाते हैं, पर वर्तमान समय में क़िला के मैदान में बहुत भीड़ दीखती है।ये स्थल महापुरुषों से सेवित रहा है, यहाँ अनेकों मठ-मन्दिर, गुरुकुल आदि है, जिसमें प्रसिद्ध श्रीरामानुज श्रीवैष्णव सम्प्रदाय का श्रीलक्ष्मीनारायण मन्दिर, श्रीवैकुण्ठनाथ देवस्थान ( दिव्यदेश ), श्रीत्रिदण्डी स्वामी समाधिस्थल मन्दिर,श्रीनिवास मन्दिर,श्रीरामानुज कोट, श्रीरामचबुतरा मन्दिर, श्रीराम मन्दिर, श्रीसोमेश्वरनाथ मन्दिर, रामरेखाघाट, बड़ी मठिया, छोटी मठिया, श्रीप्रपन्न राघव मन्दिर विश्राम कुण्ड ( बसांवमठ ), श्रीनाथबाबा मन्दिर, श्रीरामेश्वर मन्दिर, श्रीगौरीशंकर मन्दिर, श्रीसीताराम विवाहस्थल मन्दिर, श्रीविश्वामित्र आश्रम , श्रीवामन आश्रम मन्दिर आदि दर्शनीय स्थल है।भारतीय कला ,संस्कृति एवं ऐतिहासिक, अनूठा सुभग शहर बक्सर का पावन पंचक्रोशी परिक्रमा अनन्त फलदायी है ;यहाँ की प्रसिद्ध उक्ति है -‘ *माई बिसरी बाप बिसरी, बगसर के लिट्टी चोखा ना बिसरी’।* इस वर्ष २८ नवम्बर को पंचक्रोशी परिक्रमा का समापन तथा लिट्टी-चोखा का मेला है। जय श्रीमन्नारायण