
जल जीवन हरियाली अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह के प्रथम मंगलवार को जल जीवन हरियाली दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इस क्रम में आज जन संपर्क विभाग बिहार पटना द्वारा वर्चुअल मोड में जल जीवन हरियाली जागरूकता अभियान विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सचिव, सूचना एवं जन संपर्क विभाग, बिहार, श्री अनुपम कुमार ने जल जीवन हरियाली अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री बिहार द्वारा जल जीवन हरियाली अभियान की परिकल्पना की गई जो बिहार एवं देश के लिए वरदान साबित हुई है। जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाले परिणामों से बचाव के लिए यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा व्यापक जन जागरूकता के माध्यम से हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित एव संरक्षित कर सकते हैं। उप सचिव, सूचना जन संपर्क विभाग, बिहार श्री संजय कृष्ण ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए विषय वस्तु पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यापक जनसहभागिता एव जन जागरूकता के द्वारा ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है।**परिचर्चा में भाग लेते हुए कृषि विभाग से वक्ता ने कहा कि इस समय एलईडी युक्त रथ का प्रयोग पंचायत स्तर पर किया जा रहा है जिसमें किसानों के बीच रबी फसल की तकनीकी जानकारी फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत पराली के नहीं जलाने संबंधित संदेशों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है साथ में यह भी बताया जा रहा है कि फसल अवशेष का उपयोग वर्मी कंपोस्ट तैयार करने एवं मशरूम की उत्पादन में किया जा सकता है। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में पेंटिंग निबंध एवं वाद विवाद प्रतियोगिता के द्वारा बच्चों में पर्यावरण के प्रति लगाव एवं जन जागरूकता फैलाया जा सकता है। जिससे नई पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति विशेष लगाव रहे। संयुक्त निदेशक पशु एवं मत्स्य विभाग ने कहा कि तालाबों, नदियों, नहरों एवं अन्य जल स्रोतों के सूखने, जल में प्रदूषण तथा खेतों को दलदल की स्थिति में बदलने, को व्यापक जन जागरूकता के द्वारा ही रोका जा सकता है। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है साथ ही जल संचयन स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने एवं नए जल स्रोतों के निर्माण के लिए प्रयास किया जाना चाहिए।**वन विभाग के वक्ता ने बताया कि 2012 में कृषि रोड मैप में वन विभाग को एक अलग पहचान दिया गया। कृषि वानिकी के द्वारा व्यापक जन सहभागिता के साथ बिहार में वृक्षारोपण के तहत ट्री कवर एरिया को 15% तक किया गया है। साथ ही इसका लक्ष्य 2022 तक 17% का है। कृषि वानिकी के तहत अब तक किसानों ने आठ करोड़ पौधे लगाए हैं। अभी तक 28-29 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। साथ ही 2019-20 से जीविका दीदी के द्वारा हर गांव में वृक्ष लगाने के लिए लोगों को जागरुक किया जा रहा है।**मुख्य अभियंता पीएचईडी ने बताया कि जल को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने, पृथ्वी के गर्भ से जल के दोहन को कम करने एवं जल संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है। इसके लिए लोगों में व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है। इस समय ग्राउंड लेवल वाटर घट रहा है इसे बचाने के लिए वर्षा जल का संचयन आवश्यक है। वृक्षों के द्वारा जल का संचयन बढ़ाया जा सकता है। 30 से 40% पानी की आवश्यकता हम वर्षा जल का उपयोग कर, कर सकते है। साथ ही जल संचयन संरचनाओं को संरक्षण एवं नए जल संचयन संरचनाओं के निर्माण की आवश्यकता है। साथ ही इस बात पर चिंता व्यक्त की गई कि पानी का दोहन, ग्राउंड लेवल की वाटर रिचार्ज की अपेक्षा ज्यादा है। हैंड पंप के पास सोखता बनाना चाहिए।**समाहरणालय स्थित सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हॉल से जिला जन संपर्क पदाधिकारी बक्सर, डीपीओ मनरेगा, कृषि विभाग, मत्स्य विभाग, वन विभाग के पदाधिकारी उपस्थित थे।* ===================================== *भावी पीढ़ीयो को हमारा उपहार, जल-जीवन-हरियाली युक्त बिहार*==================