
*🚩शारदीय नवरात्रि 26 सितंबर 2022 दिन सोमवार से प्रारंभ हो रहा है🚩*🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀 *🙏इस वर्ष देवी भगवती का आगमन हाथी से हो रहा है एवं गमन मुर्गा से हो रहा है जिसका फल अशुभ फल कारक है🙏* 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀शक्ति की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र 26 सितंबर 2022 से शुरु हो रहे हैं. इसका समापन 5 अक्टूबर 2022 को होगा । वर्ष में चार नवरात्रि होती है दो गुप्त और दो प्रत्यक्ष. शास्त्रों के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि आरंभ हो जाती है. नौ दिन तक चलने वाले शारदीय नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है औऱ दशमी तिथि के दिन दशहरा मनाया जाता है. नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना का विधान है. शुभ मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना से विशेष फल प्राप्त होता है। *🌴 इस वर्ष कलश स्थापन का शुभ मुहूर्त एवं घटस्थापन की विधि:🌴* *इस वर्ष शारदीय नवरात्र मे कलश स्थापन का पुनीत कार्य 26 सितंबर सोमवार को दिन भर किसी भी समय किया जा सकता है।* मात्रृ रूप में प्रकृति की आद्य मौलिक शक्ति साक्षात ब्रह्माणी मां भगवती की आराधना एवं जन जन में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के चरित्र गान का तथा शारदीय नवरात्र 26 सितंबर सोमवार से प्रारंभ हो रहा है। इस वर्ष कलश स्थापन के लिए दिन भर का समय शुद्ध एवं प्रशस्त है। शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना कराना तथा देवी चरित्र का पाठ सुनना मनुष्य को सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त करते हुए धन-धान्य एवं पुु्त्रादि से संपन्न करता है । रावण पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान राम द्वारा की गई शक्ति पूजा पर आधारित सप्तमी तिथि में पूजा पंडालों में देवी प्रतिमाओं की स्थापना 2 अक्टूबर रविवार को की जाएगी सप्तमी तिथि को रविवार होने से बंगीय पद्धति के अनुसार देवी ( गजारढा) अर्थात हाथी पर सवार होकर आऐगी । जिसका फल वृष्टि कारक माना गया है । अष्टमी की महानिशा पूजा 2 अक्टूबर रविवार को रात में होगी । महा अष्टमी व्रत पूजा 3 अक्टूबर सोमवार को होगी एवं संधि पूजा का समय दिन में 3:36 बजे से 4:24 बजे तक का होगा । महानवमी का मान 4 अक्टूबर मंगलवार को होगा एवं पूर्ण नवरात्रि के समापन का हवन पूजन नवमी तिथि पर्यंत दिन में 1:32 बजे तक कर लिया जाएगा।नवरात्रि में देवी की पूजा का फल तभी मिलता है जब नियमों का ध्यान रखा जाए. नवरात्र के पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करें।कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी के पात्र में पवित्र मिट्टी रखें और उसमें जौ बोएं.पूजा स्थान या ईशान कोण में कलश स्थापन शुभ मानी जाती है. यहां गंगाजल छिड़कर साफ सफाई कर लें. पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इस पर मां दुर्गा की तस्वीर स्थापित करें.एक तांबे या मिट्टी के कलश में गंगा जल या स्वच्छ जल भरकर इसमें सिक्का, अक्षत सुपारी, लौंग के जोड़ा, दूर्वा घास, डालें. कलश के मुख पर मौली बांधेंएक नारियल पर लाल चुनरी को मौली से बांध दें. कलश में आम के पत्ते लगाकर उसपर ये नारियल रखे दें।अब जौ वाले पात्र और कलश को मां दुर्गा की फोटो के दायीं ओर स्थापित कर दें. कलश स्थापना पूरी कर मां जगदंबा की पूजा करें। *🔕शारदीय नवरात्रि में किस दिन कौन तिथि में दुर्गा मां के किस रूप की पूजा होगी।🔕* 🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀26 सितंबर 2022 मां शैलपुत्री (पहला दिन) प्रतिपदा तिथि27 सितंबर 2022 मां ब्रह्मचारिणी (दूसरा दिन) द्वितीया तिथि28 सितंबर 2022 मां चंद्रघंटा (तीसरा दिन) तृतीया तिथि29 सितंबर 2022 मां कुष्मांडा (चौथा दिन) चतुर्थी तिथि30 सितंबर 2022 मां स्कंदमाता (पांचवा दिन) पंचमी तिथि1 अक्टूबर 2022 मां कात्यायनी (छठा दिन) षष्ठी तिथि2 अक्टूबर 2022 मां कालरात्रि (सातवां दिन) सप्तमी तिथि3 अक्टूबर 2022 मां महागौरी (आठवां दिन) दुर्गा अष्टमी 4 अक्टूबर नवमी तिथि (नौवां दिन) सिद्धिदात्री5 अक्टूब 2022 मां दुर्गा विसर्जन, दशमी तिथि विजयादशमी दशहरा🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🙏 *प्रोफ़ेसर मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री* 🙏 *कर्मकांड केसरी,याज्ञिक सम्राट* चरित्रवन बक्सर बिहार