
🌷 गोपाष्टमी आज 12 नवम्बर शुक्रवार को है। 🌷
आज के इस दिन गौमाता की पूजा करने से घर में बनी रहती है सुख समृद्धि
प्रोफ़ेसर मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री
Pro.Mukteshwar. Tiwari
कर्मकांड केसरी याज्ञिक सम्राट्
चरित्रवन बक्सर बिहार
व्याख्याता संस्कृत विभाग
वीर कुंवर राज बहादुर सिंह महाविद्यालय
धारूपुर बिक्रमगंज रोहतास बिहार
कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के आठवें दिन गोपाष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। यह गायों की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित एक त्यौहार है। इस दिन लोग गायों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करते हैं जिन्हें जीवन देने वाला माना जाता है। इस बार ये पर्व आज 12 नवंबर, शुक्रवार को है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर सप्तमी तक भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। आठवें दिन इंद्र अहंकाररहित होकर श्रीकृष्ण की शरण में आए तथा क्षमायाचना की। तभी से कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा है। ये पर्व गौधन से जुड़ा है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और बिना गौ धन के कृषि के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। इसलिए गौ धन से जुड़ा ये पर्व बहुत विशेष माना जाता है।
गोपाष्टमी पर ऐसे करें गौ माता की पूजा-
अष्टमी तिथि को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सबसे पहले स्वयं स्नानादि करना चाहिए और भगवान कृष्ण के समक्ष दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार करना चाहिए और गाय को घुंघरू आदि पहनाने चाहिए। गाय को आभूषण या फूलों की माला पहनाकर श्रंगार करें। गौ माता के सींग रंगकर उनमें चुनरी बांधे। और गौमाता का पूजन करें और भोजन कराएं। इसके बाद गौमाता की परिक्रमा करनी चाहिए। गोधूलि बेला में पुनः गौमाता का पूजन किया जाता है और उन्हें गुड़, हरा चारा आदि खिलाएं। यदि आपके घर में गाय न हो तो किसी गौशाला में जाकर गौमाता का पूजन करना चाहिए।
इस प्रकार पूजन करने के बाद गौमाता के चरणों की मिट्टी को मस्तक पर लगाएं। ऐसा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
गोपाष्टमी का महत्व
गायों को हिंदू धर्म और संस्कृति की आत्मा माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि तैतींस कोटि देवी-देवता गोमाता में निवास करते हैं और इसलिए गाय हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व रखती है। गाय को आध्यात्मिक और दिव्य गुणों का स्वामी माना जाता है और यह देवी पृथ्वी का एक और रूप है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गोपाष्टमी की पूर्व संध्या पर गाय की पूजा करने वाले व्यक्तियों को एक खुशहाल जीवन और अच्छे भाग्य का आशीर्वाद मिलता है। यह भक्तों को उनकी इच्छाओं को पूरा करने में भी मदद करता है।
इसलिए गौमाता को माना जाता है पवित्र…
– श्रीमद्भागवत के अनुसार, जब देवता और असुरों ने समुद्र मंथन किया तो उसमें कामधेनु निकली। पवित्र होने की वजह से इसे ऋषियों ने अपने पास रख लिया। माना जाता है कि कामधेनु से ही अन्य गायों की उत्पत्ति हुई।
– धर्म ग्रंथों में ये भी बताया गया है गाय में तैंतीस कोटि देवी- देवता निवास करते हैं। गाय की पूजा करने से सभी देवताओं का पूजन अपने आप ही हो जाता है।
– श्रीमद्भागवत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण भी गायों की सेवा करते थे। श्रीकृष्ण रोज सुबह गायों की पूजा करते थे और ब्राह्मणों को गौदान करते थे।
– महाभारत के अनुसार, गाय के गोबर और मूत्र में देवी लक्ष्मी का निवास है। इसलिए इन दोनों चीजों का उपयोग शुभ काम में किया जाता है।
– वैज्ञानिकों ने भी माना है कि गौमूत्र में बहुत से उपयोगी तत्व पाए जाते हैं, जिनसे अनेक बीमारियों का उपचार संभव है।
– गाय का दूध, घी आदि चीजें भी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। विशेष अवसरों पर ब्राह्मणों को गाय दान करने करने की परंपरा आज भी है।
🙏प्रो 0 मुक्तेश्वर नाथ शास्त्री 🙏
कर्मकांड केसरी याज्ञिक सम्राट्
चरित्रवन बक्सर बिहार