
कंगना के साथ जो हुआ उसपर केंद्र सरकार, मोदी शाह को दोष देना ठीक नहीं! उतावलेपन में लोग कुछ भी लिखते है। मोटा भाई ने तो कंगना को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी! इससे ज्यादा केंद्र सरकार और कुछ नहीं कर सकती थी!
अगर आप सोच रहे है कि केंद्र सरकार बीएमसी की कार्यवाही रोक सकती थी, तो आप गलत सोच रहे है! राज्य और केंद्र सरकार की अपनी अपनी संवैधानिक शक्तियां है, सीमाएं है!
मै आलोचना नहीं करता क्योंकि मै जानता हूं कि लोग आलोचना या विरोध में फर्क नहीं समझते! अपनी सरकार या नेतृत्व की आलोचना करना मेरा स्वभाव भी नहीं है, जब मै जानता हूं कि लड़ाई बहुत बड़ी है और मेरा नेतृत्व मुझसे ज्यादा बुद्धिमान है।
लोग जरा जरा सी बात पर अधीर होकर बीजेपी मोदी शाह तक पहुंच जाते है। जबकि बीजेपी मोदी शाह का लक्ष्य हमारी आपकी सोच से भी कहीं बड़ा है। लड़ाई बड़ी है और लंबी चलने वाली है। लोग अक्सर ये बात क्यों भूल जाते है ? बड़ी लड़ाई जीतने के लिए कई बलिदानियां भी देनी पड़ती है।
देश में लोकतंत्र है इसलिए राजनीति है। लोकतंत्र में पूर्ण बहुमत की सत्ता बहुत मायने रखती है। राजनीति में कब क्या करना है ये बात मोदी जी और मोटा भाई बहुत अच्छे से जानते है।
कंगना का मेटर तो वास्तव में उद्धव ठाकरे की व्यक्तिगत साख का मेटर बन चुका था। कंगना ने कैसी कैसी ताकतों से लड़ाई मोल ली है ये अधिकतर लोग नहीं समझ सकते। ये साहस कंगना को सोशल मीडिया पर अपार जनसमर्थन से मिला है। आज पूरा देश बॉलीवुड की गन्दगी पर चर्चा कर रहा है। बॉलीवुड पूरे देश के सामने एक्सपोज हो रहा है। कई बड़े बड़े महानायकों पर आज पब्लिक थूक रही है।
उतावलेपन में बीजेपी मोदी शाह पर आरोप लगाना ठीक नहीं। अधिकतर आलोचनाएं जानकारी के अभाव में होती है। यहां भी यही हुआ। लोगों को नहीं पता कि बीजेपी ने कंगना पर हुई तानाशाही के खिलाफ क्या स्टैंड लिया है।
बीएमसी की मेयर के खिलाफ बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा बीजेपी ने अपने सारे पार्षदों को अपने अपने इलाके में अवैध निर्माण की सूची तैयार करने को कहा है, इसपर विरोध प्रदर्शन करेगी। उद्धव सरकार के तानाशाही रवैए और बीएमसी की कार्यवाही पर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इस कार्यवाही को बदले की भावना बताया है और ये भी पूछा कि बीएमसी ने मातोश्री में अवैध निर्माण पर कार्यवाही क्यों नहीं की।
इस पूरे घटनाक्रम में बीजेपी तो कंगना के साथ ही दिख रही है, राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा भी डिबेट में फासीवादी शिवसेना की धज्जियां उड़ाते दिखे। चूंकि कोविड है इसलिए ज्यादा कुछ कर भी नहीं सकते, वरना अब तक सड़कों पर उतरकर बीजेपी प्रदर्शन कर रही होती।
रही बात बीजेपी का समर्थन करने की तो मै उम्मीद नहीं रखता कि बीजेपी बीजेपी या मोदी मोदी करने पर चार बीजेपी के नेता मुसीबत पड़ने पर मेरी मदद करें। बीजेपी राष्ट्रवादी है और मेरा स्वार्थ राष्ट्रवाद है इसलिए बीजेपी का समर्थन करता हूं।