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पटना : बिहार में COVID-19 टेस्टिंग के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप लग रहे हैं. बिहार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने इसे लेकर सरकार पर आज निशाना साधा. तेजस्वी यादव ने कहा कि मीडिया ने COVID-19 टेस्ट को लेकर की जा रही कथित फर्जी इंट्रियों को उजागर किया है. आंकड़ों में हेरफेर करके फर्जीवाड़ा चल रहा था. इसी तरह से कई सालों में सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया. उन्होंने इस “घोटाले” के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाबदेह ठहाराया है.
जानकारी के मुताबिक, बिहार में कोरोना टेस्टिंग (Corona Testing Scam) के नाम पर जो कथित घोटाला हुआ है, उसके अभी तक दो तीन बिंदु बिल्कुल साफ हैं. एक तो यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डेटा की जो इंट्री हुई है, उसमें न तो मोबाइल नंबर और न ही पता मैच कर रहा है और बहुत सारे मोबाइल नंबर फर्जी साबित हुए हैं. कई लोगों से बात करने पर पता चला है कि उनकी जांच तो कभी हुई नहीं. सरकार इसके पीछे तीन कारण गिना रही है. हालांकि, विपक्ष का कहना है कि जांच के नाम पर ‘एंटीजन घोटाला’ हुआ है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ढाई महीने पहले विधानसभा में यह अंदेशा जताया था.

हालांकि, सरकार का कहना है कि बहुत सारे लोगों ने जैसे एक ही परिवार के कई लोगों की जांच हुई तो उन्होंने एक ही फोन नंबर दे दिया. कई लोगों ने अपने नाम और पते गलत दिए क्योंकि महामारी को लेकर लोगों में कुछ भ्रांतियां हैं.

क्या है एंटीजन घोटाला?
दरअसल, कोरोना की जांच के लिए दो तरह के टेस्ट- एंटीजन और आरटी पीसीआर- किए जाते हैं. बिहार में 2 करोड़ से ज्यादा टेस्ट हुए हैं, जिसमें से करीब 80 प्रतिशत टेस्ट एंटीजन हैं. इसके बारे में केंद्र की ओर से बिहार सरकार को भी बार-बार सुझाव दिए जा रहे थे कि आरटी पीसीआर टेस्ट किया जाए.

नीतीश सरकार पर बरसे तेजस्वी यादव
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट में कहा, “मैंने पहले ही बिहार में कोरोना घोटाले की भविष्यवाणी की थी. जब हमने घोटाले का डेटा सार्वजनिक किया था तो CM ने हमेशा की तरह नकार दिया. इन्होंने अधिकारी बदल Anti-gen का वो “अमृत” मंथन किया कि 7 दिनों में प्रतिदिन टेस्ट का आंकड़ा 10 हज़ार से 1 लाख और 25 दिनों में 2 लाख पार करा दिया.”

इससे पहले, दो अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा- “बिहार की आत्माविहीन भ्रष्ट नीतीश कुमार सरकार के बस में होता तो कोरोना काल में गरीबों की लाशें बेच बेचकर भी कमाई कर लेती! इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह साफ हो गया है कि सरकारी दावों के उलट कोरोना टेस्ट हुए ही नहीं और मनगढ़ंत टेस्टिंग दिखा अरबों का हेर-फेर कर दिया!”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे द्वारा जमीनी सच्चाई से अवगत कराने के बावजूद CM और स्वास्थ्य मंत्री बड़े अहंकार से दावे करते थे कि बिहार में सही टेस्ट हो रहे हैं. टेस्टिंग के झूठे दावों के पीछे का असली खेल अब सामने आया है कि फर्जी टेस्ट दिखाकर नेताओं और अधिकारियों ने अरबों रुपयों का भारी बंदरबांट किया है!”

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