
बक्सर नगर परिषद कार्यालय परिसर में ऊंची आवाज में बात करने पर जुर्माना वसूलने, तुगलकी आदेश के संबंध में। महोदय, जैसे
सादर सूचित करना है कि बक्सर नगर परिषद कार्यालय परिसर के भीतर तीन-चार जगहों पर एक आदेश चिपकाया गया है। सफेद कागज में साफ-साफ प्रिंटेड हैं- ‘परिसर में ऊंची आवाज में बात करने पर 500 रूपया जुर्माना के रूप में वसूला जाएगा। कृपया अनुरोध है कि साइलेंस बना हुए करें एवं करवाएं।’ आपको बता दें कि यह अजीबोगरीब आदेश सिर्फ इसलिए लागू किया गया है, ताकि कार्य भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे नगर परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कोई आवाज न उठा सके। ऐसे बेतुके आदेश तो शायद ब्रिटिश हुकूमत में भी जारी नहीं होते होंगे। कार्यालय परिसर में अक्सर भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था के शिकार लोगों से कर्मचारियों की बहस होती रहती हैं, इससे हमेशा डर रहता है कि भीतर चल रहे काले कारनामों की जानकारी बाहर के लोगों को भी हो जाएगी। इसलिए जनता की आवाज को दबाने के लिए इस तरह का आदेश कार्यालय की दीवारों पर लगा दिया गया है, ताकि लोग जुर्माने के डर से उनका विरोध न कर सकें। महोदय, वैसे भी इस तरह का आदेश एक लोकतांत्रिक देश में हैरत पैदा करता है।
आपको सूचित करते हुए यह जानना चाहता हूँ कि क्या ऐसा करने का हुक्म आपकी तरफ से दिया गया है? यदि नहीं, तो अविलंब इस आदेश के भीतर छिपे तथ्य को समझते हुए तत्काल इस पर रोक लगाई जाए या फिर नगर परिषद कार्यालय में कितने डेसीबल ऊंची आवाज की लिमिट तय की गई है, ये बताया जाए और ध्वनि तीव्रता मापक यंत्र लगवाया जाए, जो यह तय करे कि किसने तय मानक से ऊंची आवाज में बात की है।